कभी सोचा है कि मरने के बाद भी किसी की शादी हो सकती है। वो भी 30 साल बाद। लेकिन एक ऐसी जगह है जहां पर लड़का-लड़की के मरने के बाद भी उनका विवाह किया जाता है। वो भी धूमधाम से।

रिलेशनशिप डेस्क. पूरी दुनिया में शादी को लेकर अलग-अलग परंपरा है। लेकिन भारत में एक ऐसी जगह हैं जहां भूतों की शादी कराई जाती है। पढ़कर हैरान हो गए ना। कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ जिले में मरने के बाद लड़का-लड़की शादी कराई जाती है। इसके पीछे मोक्ष कनेक्शन जुड़ा हुआ है। हाल ही में यहां एक ‘प्रेत कल्याणम’ (मृतकों का विवाह) हुआ जो सुर्खियों में था। चलिए इस अजीबो-गरीब परंपरा के बारे में बताते हैं।

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18 साल पहले जिसकी होती है मौत उसे बनाया जाता है दूल्हा-दुल्हन

 जिन बच्चों की मौत 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है। उनकी शादी 18 साल के बाद की जाती है। लेकिन शर्त ये होती है कि उनकी मौत की तरह ही लड़के या लड़की की मौत हुई हो। मतलब उनकी मृत्यु के कुछ साल बाद जब उनकी ही जैसी मृत्यु की कहानियों वाले लड़का या लड़की मिलते हैं तो उनकी शादी कराई जाती है। 

मोक्ष के लिए कराई जाती है शादी 

यहां के लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद उनके चहेते की आत्मा भटकती है और उन्हें कभी मोक्ष नहीं मिलता है। शादी के बिना जीवन अधूरा होता है। इसलिए भटकती आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो इसलिए इस रस्म को निभाया जाता है। इस शादी में बाराती-शराती भी होते हैं और शादी की हर रस्म भी अदा की जाती है।

30 साल पहले मरे युवक-युवती की हुई शादी

हाल ही में एक यूट्यूबर एनी अरुण ने इस परंपरा को लेकर ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था,'मैं आज एक शादी में शामिल हो रहा हूं। आप पूछ सकते हैं कि इसमें ट्वीट लायक क्या है। खैर, दूल्हा वास्तव में मर चुका है और दुल्हन भी मर चुकी है। इनकी मौत के 30 साल पहले हुई थी। आज उनकी शादी हो रही है। यह उन लोगों को अजीब लग सकता है जो दक्षिण कन्नड़ की परंपराओं को नहीं जानते हैं। लेकिन यह यहां एक गंभीर परंपरा है।'

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सात फेरे से लेकर कन्यादान की हर परंपरा को निभाया जाता है

इस शादी में सबसे पहले सगाई समारोह होता है। इसके बाद शादी की परंपरा निभाई जाती है। साउथ इंडियन परंपरा के मुताबिक दूल्हा सबसे पहले ‘धारे साड़ी’ लाता है। जिसे दुल्हन शादी के समय पहनती हैं। दुल्हन को तैयार होने के लिए काफी वक्त दिया जाता है। दूल्हा-दुल्हन एक स्टैच्यू की शक्ल में होते हैं। रिश्तेदार अनुष्ठान के लिए इधर-उधर ले जाते हैं। सात फेरे से लेकर कन्यादान तक की रस्म निभाई जाती है।

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