Pahla Bada Mangal Kab Hai: धर्म ग्रंथों में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व बताया गया है। ये हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है। इस महीने के प्रत्येक मंगलवार को हनुमानजी की विशेष पूजा की जाती है, इन्हें बड़ा और बुढ़वा मंगल कहते हैं।
Bada Mangal Puja Vidhi: ज्येष्ठ मास में जितने भी मंगलवार आते हैं, उन्हें बड़ा मंगल कहा जाता है। कुछ स्थानों पर इसे बुढ़वा मंगल भी कहते हैं। इन सभी मंगलवार पर हनुमानजी की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। खास बात यह है कि साल 2026 में कुल 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिससे भक्तों में विशेष उत्साह है। जानें ऐसा क्यों हो रहा है और इन सभी की डेट्स…
ये भी पढ़े-
May 2026 Shubh Muhurat: मई में गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन के कितने शुभ मुहूर्त? नोट करें डेट्स
बड़ा मंगल 2026 डेट्स
बड़ा मंगल ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवार को मनाया जाता है। इस बार ज्येष्ठ माह का अधिक मास रहेगा इसलिए इस महीने में 4 नहीं बल्कि 8 मंगलवार आ रहे हैं। ऐसा दुर्लभ संयोग कईं दशकों में एक बार बनता है। जानें बड़ा मंगल 2026 की सभी तारीखें…
पहला बड़ा मंगल- 5 मई 2026
दूसरा बड़ा मंगल- 12 मई 2026
तीसरा बड़ा मंगल- 19 मई 2026
चौथा बड़ा मंगल- 26 मई 2026
पांचवां बड़ा मंगल- 2 जून 2026
छठा बड़ा मंगल- 9 जून 2026
सातवां बड़ा मंगल- 16 जून 2026
आठवां बड़ा मंगल- 23 जून 2026
ये भी पढ़ें-
May 2026 Hindu Calendar: कब है शनि जयंती और वट सावित्री व्रत? नोट करें मई के व्रत-त्योहारों की डेट
बड़ा मंगल पर कैसे करें हनुमानजी की पूजा?
- बड़ा मंगल की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद पूजा का संकल्प लें। अगर आप व्रत करना चाहते हैं तो उसका भी संकल्प लें।
- अपने आस-पास स्थित किसी हनुमान मंदिर में जाकर पूजा करें। सबसे पहले हनुमानजी को तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं।
- इसके बाद सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। बूंदी या बेसन का लड्डू का भोग लगाएं।
- पूजा करते समय ऊं हं हनुमते नम: मंत्र का जप करें। इसके बाद आरती करें। पूजा के बाद संभव हो तो हनुमान चालीसा का पाठ भी करें।
- इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज आदि चीजों का दान देना भी शुभ रहता है। इससे भी जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
हनुमानी की आरती लिरिक्स हिंदी में
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्टदलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरिवर काँपै।
रोग-दोष जाके निकट न झाँपै ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारि सीय सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
लंका जारि असुर संहारे ।
सियारामजीके काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
आनि सजीवन प्रान उबारे ॥
पैठि पताल तोरि जम-कारे ।
अहिरावन की भुजा उखारे ॥
बायें भुजा असुर दल मारे ।
दहिने भुजा संतजन तारे ॥
सुर नर मुनि आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरति करत अंजना माई ॥
जो हनुमान (जी) की आरति गावै ।
बसि बैकुंठ परमपद पावै ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
