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Jagannath Temple Facts: जगन्नाथ मंदिर में कब मनाते हैं ‘रसगुल्ला दिवस’, क्या है ये अनोखी परंपरा?
Jagannath Temple Rasgulla Day: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा इस बार 16 जुलाई से शुरू हो चुक है। इसकी वापसी 24 जुलाई को होगी। वापसी के बाद जगन्नाथ मंदिर में कईं रोचक परंपराएं निभाई जाती हैं।

जानें जगन्नाथ मंदिर की रोचक परंपराओं के बारे में
Jagannath Temple Tradition: ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां हर साल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर जाते हैं। इसके बाद जब भगवान जगन्नाथ दोबारा अपने घर यानी मंदिर लौटते है तो यहां कईं रोचक परंपराएं निभाई जाती हैं, इनमें से एक रसगुल्ला दिवस भी है। आगे जानिए इस अनोखी परंपरा के बारे में...

कब मनाते हैं रसगुल्ला दिवस?
भगवान जगन्नाथ जब अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर से लौटते हैं तो इस वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। बहुड़ा यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। इस परंपरा को सुना बेशा कहते हैं। जब भगवान जगन्नाथ मुख्य मंदिर में प्रवेश करते हैं तो देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें रसगुल्ला अर्पित करते हैं। इसी वजह से इस परंपरा को ‘रसगुल्ला दिवस’ के नाम से जाना जाता है।
भगवान जगन्नाथ देवी लक्ष्मी को क्यों खिलाते हैं रसगुल्ला?
मान्यता है कि जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई और बहन के साथ रथयात्रा पर निकलते हैं तो देवी लक्ष्मी मंदिर में ही रहती हैं। भगवान जगन्नाथ जब कई दिनों तक वापस नहीं लौटते तो देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। जब भगवान जगन्नाथ वापस लौटते हैं तो उन्हें मनाने के लिए रसगुल्ला अर्पित करते हैं। स्थानीय रूप से इस परंपरा को रसागोला दिबासा कहते हैं। इसके बाद ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का पूर्ण रूप से समापन होता है।
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रसगुल्ले ही क्यों खिलाते हैं देवी लक्ष्मी को?
रसगुल्ला भगवान जगन्नाथ को बेहद प्रिय भोगों में से एक माना जाता है। इसी वजह से इस दिन भगवान को रसगुल्ला चढ़ाने की परंपरा है। यह परंपरा पति-पत्नी के बीच प्रेम, मान-मनुहार और रिश्ते में मिठास का प्रतीक भी मानी जाती है। कहते हैं कि जब से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा शुरू हुई है, तभी से रसगुल्ला दिवस भी यहां मनाया जा रहा है।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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