Narad Jayanti 2026: नारद मुनि के बारे में हम सभी जानते हैं। हर साल ज्येष्ठ मास में इनकी जयंती भी मनाई जाती है। नारद मुनि किसके अवतार हैं इसके बारे में श्रीमद्भगवत पुराण में विस्तार से बताया गया है।
Kab Hai Narad Jayanti 2026: ज्येष्ठ मास की द्वितिया तिथि बहुत ही खास है क्योंकि इस दिन देवर्षि नारद की जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी तिथि पर देवर्षि नारद का जन्म हुआ था। इस बार ये पर्व 3 मई, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन अनेक मंदिरों में देवर्षि नारद की विशेष पूजा की जाती है। धर्म ग्रंथों में नारद मुनि को ब्रह्माजी का मानस पुत्र बताया गया है। देवर्षि नारद से जुड़ी अनेक कथाएं श्रीमद्भागवत आदि ग्रंथों में बताई गई हैं। आगे जानिए देवर्षि नारद से जुड़ी रोचक बातें…
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किसके अवतार हैं देवर्षि नारद?
श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में बताया गया है। देवर्षि नारद भी इन अवतारों में से एक हैं। देवर्षि नारद भगवान विष्णु के अवतार होते हुए भी उनके परम भक्त भी हैं। देवर्षि नारद तीनों लोकों में घुमते हुए निरंतर भगवान विष्णु का नाम जाप करते रहते हैं। इनकी कईं कथाएं भी प्रचलित हैं जिससे ये सिद्ध होता है ये भगवान विष्णु को अति प्रिय हैं।
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क्यों तीनों लोकों में भटकते रहते हैं देवर्षि नारद?
प्रचलित कथा के अनुसार, दक्ष प्रजापति के 10 हजार पुत्र थे, देवर्षि नारदजी ने उन सभी को वैराग्य का ज्ञान देकर राजपाठ से वंचित कर दिया जिससे कारण वे तपस्या में लीन हो गए। जब ये बात राजा दक्ष को पता चली तो उन्होंने देवर्षि नारदजी को श्राप दिया ‘तुम कभी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुक सकोगे, हमेशा भटकते रहोगे।‘ इसी वजह से देवर्षि नारद कहीं पर भी अधिक समय के लिए नहीं रुकते।
देवर्षि नारद को क्यों दिया भगवान विष्णु को श्राप?
एक बार देवर्षि नारद को भगवान विष्णु के परम भक्त होने का गर्व हो गया। इस अंहकार को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने एक लीला रची। उन्होंने एक सुंदर नगर में राजकुमारी के स्वयंवर रचाया। राजकुमारी की सुंदरता देख देवर्षि नारद भी उस पर मोहित हो गए और भगवान विष्णु के रूप में स्वयंवर पहुंच गए। लेकिन भगवान विष्णु की माया से उनका मुख बंदर जैसा हो गया जिसके कारण राजकुमारी ने उन्हें अपने वर के रूप में नहीं चुना। जब नारदजी को पता चला कि ये सब विष्णुजी की माया थी तो उन्होंने श्राप दिया कि ‘जिस तरह आज मैं स्त्री के लिए परेशान हो रहा हूं, उसी तरह आपको भी मनुष्य जन्म लेकर स्त्री वियोग सहना पड़ेगा।’ बाद में नारद मुनि को अपनी गलती का अहसास हुआ।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
