Padmini Ekadashi Story: कब है पद्मिनी एकादशी? इस व्रत में किसकी पूजा की जाती है? कार्तवीर्य अर्जुन ने किस राक्षस राजा को बंदी बनाया था? पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से क्या होता है?
Padmini Ekadashi Vrat Katha In Hindi: इन दिनों ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को धर्म ग्रंथों में बेहद पुण्यदायी माना गया है। इस बार पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। पद्मिनी एकादशी से जुड़ी एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे जानिए पद्मिनी एकादशी व्रत की पूरी कथा…
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पद्मिनी एकादशी व्रत की कथा
त्रेतायुग में महिष्मती नगरी में कार्तवीर्य नाम के एक राजा राज्य करते थे। उनकी सौ रानियां थीं, लेकिन किसी से भी उन्हें योग्य पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। पुत्र की इच्छा से राजा ने अनेक यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करवाए, परंतु कोई लाभ नहीं मिला। अंत में राजा ने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया और अपनी पत्नी प्रमदा के साथ गंधमादन पर्वत पर चले गए।
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राजा और रानी ने वहां दस हजार वर्षों तक कठिन तप किया, लेकिन भगवान प्रसन्न नहीं हुए। तपस्या के कारण राजा का शरीर बहुत कमजोर हो गया। यह देखकर रानी प्रमदा दुखी हुईं और महासती अनसूया से इसका कारण पूछा। तब देवी अनसूया ने बताया कि अधिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की परम एकादशी बहुत पुण्यदायी होती हैं। इन व्रतों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
देवी अनसूया के कहने पर रानी प्रमदा ने पद्मिनी एकादशी का व्रत किया और रातभर जागरण किया। रानी की भक्ति से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। रानी ने अपने पति के लिए पुत्र का वरदान मांगा। तब भगवान विष्णु ने राजा को ऐसा पुत्र मिलने का आशीर्वाद दिया, जो देवता, दानव और मनुष्यों से अजेय हो।
कुछ समय बाद राजा के यहां कार्तवीर्य अर्जुन नामक महान पुत्र का जन्म हुआ। वह बहुत पराक्रमी और शक्तिशाली थे। उन्होंने रावण जैसे बलशाली राजा को भी युद्ध में पराजित कर बंदी बना लिया था। इस प्रकार पद्मिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा को महान पुत्र की प्राप्ति हुई।
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