Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया को बहुत ही शुभ तिथि माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी की पूजा से घर में कभी धन की कमी नहीं होती। 

Akshaya Tritiya 2025: धर्म ग्रंथों के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इसे अबूझ और स्वयंसिद्ध मुहूर्त कहते हैं। यानी इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। इस बार अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर ही देवी लक्ष्मी ने कुबेर को धनाध्यक्ष बनाया था, इसलिए इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा भी कहते हैं कि जो व्यक्ति अक्षय तृतीया पर देवी लक्ष्मी की पूजा करता है, उसे जीवन में कभी धन की कमी नहीं आती। आगे जानिए अक्षय तृतीया पर कैसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा, शुभ मुहूर्त, मंत्र आदि खास बातें…

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

अक्षय तृतीया 2025 शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya 2025 Shubh Muhurat)

- सुबह 10:47 से दोपहर 12:24 तक
- दोपहर 03:36 से शाम 05:13 तक
- शाम 05:13 से 08:49 तक
- रात 08:13 से 09:36 तक

अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya 2025 Puja Vidhi)

- 30 अप्रैल, बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद अक्षय तृतीया पूजन का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।
- शुभ मुहूर्त में किसी साफ स्थान पर भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र एक लकड़ी के पटिए यानी बाजोट के ऊपर स्थापित करें।
- भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
- अबीर, गुलाल, चावल, फूल, पान, फल, वस्त्र, नारियल आदि चीजें चढ़ाएं। मन में ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः का जाप भी करें।
- पूजा के बाद गाय के दूध से बनी खीर का भोग भी लगाएं। आरती करें और प्रसाद भक्तों में बांट दें। भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- अक्षय तृतीया पर जो देवी लक्ष्मी-भगवान विष्णु की पूजा करता है उसे धन की कमी नहीं होती और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

देवी लक्ष्मी की आरती हिंदी में (Devi Lakshmi Aarti Lyrics in Hindi)

ऊं जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णु-धाता।। ऊं।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ऊं...।।
दुर्गारूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि धन पाता।। ऊं...।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधिकी त्राता।। ऊं...।।
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता।। ऊं...।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता।। ऊं...।।
शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता।। ऊं...।।
महालक्ष्मी(जी) की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ऊं...।।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।