Shani Jayanti 2025: हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस ये पर्व मई 2025 में मनाया जाएगा। इसी दिन शनि मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की पूजा करने से विशेष शुभ फल मिलते हैं। 

Shani Jayanti 2025: ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रह बताए गए हैं। हिंदू धर्म में इन ग्रहों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है। शनि भी इन नवग्रहों में से एक है। शनि मानव जीवन पर सबसे ज्यादा असर डालता है, ऐसी मान्यता है। हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर सूर्यपुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था। इस बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या 2 दिन रहेगी, जिसके चलते शनि जयंती पर्व कब मनाया जाए, इसे लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य से जानिए शनि जयंती 2025 की सही डेट…

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कब है शनि जयंती 2025?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 26 मई, सोमवार की दोपहर 12 बजकर 12 मिनिट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 27 मई, मंगलवार की सुबह 08 बजकर 32 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अमावस्या तिथि का सूर्योदय 27 मई, मंगलवार को होगा, इसलिए इसी दिन शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा। मंगलवार को अमावस्या होने से ये भौमवती अमावस्या भी कहलाएगी। इस दिन मंगल ग्रह की शांति के लिए भी उपाय किए जा सकते हैं। 27 मई को सुकर्मा, धृति और मातंग नाम के शुभ योग भी बनेंगे, जिसके इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।

क्यों मनाते हैं शनि जयंती 2025?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान सूर्यदेव का विवाह देवताओं के शिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ था। विवाह के बाद संज्ञा को यम नाम का पुत्र और यमुना नाम की कन्या हुई। लेकिन संज्ञा अपने पति सूर्यदेव के तेज को सहन करने में असमर्थ महसूस करने लगी। तब संज्ञा ने अपनी परछाई छाया को सूर्यदेव की सेवा में छोड़ दिया और स्वयं तपस्या करने चली गई। सूर्यदेव और छाया के मिलन से शनिदेव उत्पन्न हुए। जब शनिदेव का जन्म हुआ उस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या थी। तभी से हर साल इस तिथि पर शनि जयंती कापर्व मनाया जा रहा है।

शनि और सूर्य शत्रु क्यों?

पिता-पुत्र होने के बाद भी शनिदेव और सूर्य को एक-दूसरे का शत्रु कहा जाता है, इसके पीछे एक रोचक वजह है। उसके अनुसार, सूर्यदेव को जब पता चला कि संज्ञा अपने स्थान पर छाया को छोड़कर कहीं चली गई है तो उनका व्यवहार बदल गया। छाया का पुत्र होने के कारण शनिदेव का रंग काला था, जिसे देखकर सूर्यदेव उनसे भी दूरी बनाकर रहने लगे। ये बात जानकर शनिदेव अत्यंत क्रोधित हो गए और सूर्यदेव को अपना शत्रु मानने लगे। इसलिए कहा जाता है कि पिता-पुत्र होने पर भी शनि और सूर्य एक-दूसरे के प्रति शत्रु भाव रखते हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।