Kalbhairav Ashtami 2024 Kab Hai: इस बार 22 नवंबर, शुक्रवार को कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता के अनुसार, इसी तिथि पर महादेव ने भगवान कालभैरव के रूप में अवतार लिया था। इस दिन कालभैरव को विशेष चीजें चढ़ाई जाती हैं। 

Kalbhairav Ashtami 2024 Puja Samgri: धर्म ग्रंथों के अनुसार, अगहन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसे कालभैरव जयंती भी कहते हैं। इस बार ये पर्व 22 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान कालभैरव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। भगवान कालभैरव की पूजा में कुछ चीजों का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। आगे जानिए कौन-सी हैं ये चीजें…

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नीले फूल चढ़ाएं कालभैरव को

भगवान कालभैरव की पूजा में वैसे तो किसी भी रंग के फूल चढ़ा सकते हैं लेकिन नीले रंग का फूलों का उपयोग इनकी पूजा में विशेष रूप से किया जाता है जैसे अपराजिता। इसके अलावा कौमूदी और आक के फूलों का उपयोग भी भगवान कालभैरव की पूजा में किया जा सकता है।

इमरती-दहीबड़े का लगाते हैं भोग

भगवान कालभैरव की पूजा में उड़द दाल से बनी चीजों का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है जैसे दहीबड़े और इमरती। हिंदू धर्म के अनुसार जब भी उड़द दाल का व्यंजनों का उपयोग दही के साथ किया जाता है तो उसे तामसिक माना जाता है जैसे दहीबड़ा। इसलिए इसका उपयोग कालभैरव की पूजा में विशेष रूप से होता है।

शराब को भोग भी प्रिय

भगवान कालभैरव की पूजा में शराब जरूर चढ़ाई जाती है। इसके बिना कालभैरव की पूजा अधूरी मानी जाती है। कालभैरव को शराब चढ़ाने के पीछे मान्यता है कि हम अपनी बुराइयां आपको समर्पित कर रहे हैं और भविष्य में हम इन गलत चीजों का उपयोग नहीं करेंगे।

सरसों के तेल का लगाएं दीपक

भगवान कालभैरव की पूजा में सरसों के तेल का दीपक विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि सरसों का तेल नकारात्मकता को सोख लेता है और पॉजिटिव एनर्जी फैलाता है। इससे शनि ग्रह से संबंधित शुभ फल भी मिलते हैं। ये दीपक चौमुखा हो तो और भी शुभ रहता है।



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