Ram Mandir Flag Hoisting: 25 नवंबर को अयोध्या के राम मंदिर में धर्म ध्वज की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। राम मंदिर में पूजा का अधिकार एक खास संप्रदाय के साधु-संतों के पास है, वे ही सालों से राम लला की पूजा करते आ रहे हैं।

Ram Mandir Ayodhya Tradition: इस बार विवाह पंचमी का पर्व 25 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धर्म ध्वज की स्थापना करेंगे। इस कार्यक्रम में देश की कुछ बड़ी हस्तियां भी शामिल होंगी। इस दौरान राम मंदिर में विशेष पूजा-पाठ भी किया जाएगा। राम मंदिर में एक खास संप्रदाय के पुजारियों द्वारा पूजा-पाठ की जाती है। ये परंपरा नवनिर्मित राम मंदिर बनने से पहले चली आ रहा है। आगे जानिए अयोध्या राम मंदिर में पूजा-पाठ का अधिकार किस संप्रदाय के साधु-संतों के पास है और उनसे जुड़ी खास बातें…

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कौन करता है राम मंदिर में पूजा?

अयोध्या के राम मंदिर में पूजा का अधिकार रामानंदी संप्रदाय के पास है। ये ही सालों से रामलला की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। रामलला जब टेंट में थे, तब भी रामानंदी संप्रदाय ही उनकी पूजा करता था। रामानंदी संप्रदाय के मुख्य देवता भगवान श्रीराम ही हैं। ये लोग भगवान राम को बालक रूप में पूजते हैं और ध्यान रखते हैं। रामलला को मौसम के अनुरूप वस्त्र पहनाए जाते हैं, भोग लगाया जाता है। राम लला को सुलाने और उठाने का समय भी निश्चित है। इन सभी बातों का ध्यान रामानंदी संप्रदाय के साधु-संत रखते हैं।

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किसने की थी रामानंदी संप्रदाय की स्थापना?

इतिहासकारों को अनुसार, रामानंदी संप्रदाय की स्थापना जगतगुरु श्री रामानन्दाचार्य जी ने की थी। ये संप्रदाय बैरागियों के 4 प्राचीन संप्रदायों में से एक है। रामानंदी संप्रदाय का बैरागी, रामावत और श्री संप्रदाय के नाम से भी जाना जाता है। काशी में पंचगंगा घाट पर रामानंदी संप्रदाय का प्राचीन मठ भी है। यह इनका मुख्य केंद्र भी है। रामानंदी संप्रदाय का मुख्य मंत्र ऊं रामाय नमः है। इस संप्रदाय से जुड़े साधु-संत, पुजारी संन्यासी आदि शुक्लश्री, बिंदुश्री और रक्तश्री तिलक लगाते हैं, जिससे इनकी पहचान आसानी से हो जाती है।

सालों से कर रहे रामलला की पूजा

अयोध्या में जब से रामलाल की प्रतिमा प्रकट हुई, तभी से रामानंदी संप्रदायके लोग ही उनकी पूजा करते चले आ रहे हैं। नवनिर्मित राम मंदिर से पहले भी रामानंदी संप्रदाय ही रामलला की पूजा करता था, यही परंपरा आज भी जारी है। अयोध्या में रामानंदी संप्रदाय का वर्चस्व सबसे अधिक है। रामानंदी संप्रदाय द्वारा गुरुकुल आदि भी संचालित किए जाते हैं जिसमें बच्चों को वेदों से जुड़ी शिक्षा दी जाती है।

Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।