Mahakal Sawari: उज्जैन में भगवान महाकाल की तीसरी सवारी 28 जुलाई को निकाली गई। सवारी में अनेक कलाकार अपनी लोक परपंराओं का नृत्य करते हुए दिखाई दिए। ये नजारा बहुत ही अद्भुत था।

Ujjain Mahakal Sawari: हर साल सावन मास में उज्जैन में भगवान महाकाल की सवारी निकालने की प्राचीन परंपरा है। 28 जुलाई को सावन के तीसरे सोमवार पर भगवान महाकाल की तीसरी सवारी बड़ी ही धूम-धाम से निकाली गई। शाम 4 बजे बाबा महाकाल की पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकली। यहां पुलिस विभाग द्वारा बाबा महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सवारी अपने तय मार्गों से होती हुई शाम को लगभग 7 बजे पुन: मंदिर परिसर में आ गई।

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5 लाख लोगों के दर्शन का अनुमान

सावन सोमवार होने के चलते बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार रविवार रात से ही लग चुकी थी। इसलिए रात ढाई बजे ही दर्शन के लिए बाबा महाकाल के पट खोल दिए गए। एक अनुमान के मुताबिक दोपहर एक बजे तक 3 लाख श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर चुके थे। रात तक ये संख्या 5 लाख पहुंचने की संभावना है। विनायक चतुर्थी होने के कारण भगवान महाकाल का गणेश स्वरूप में श्रृंगार किया गया है।

पहले अधिकारियों ने किया पूजन

बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से निकलने से पहले शासकीय पूजा की गई, जिसमें कलेक्टर, एसपी और शहर के बड़े अधिकारी व जनप्रतिनिधि शामिल हुए। शाम 4 बजे सवारी अपने तय मार्गों से होती हुई क्षिप्रा तट पर गई। यहां दत्त अखाड़ा के साधु-संत बाबा महाकाल की पूजा की। सवारी के दौरान सिर्फ क्षिप्रा तट पर ही पूजन के लिए बाबा की पालकी को कुछ देर के लिए विराम दिया जाता है। ये परंपरा सालों से चली आ रही है।

सवारी में दिखी लोक परंपरा की झलक 

भगवान महाकाल की सवारी के आगे अनेक भजन मंडलियां और बैंड मधुर भजन गाते हुए चल रहे हैं। सवारी में ही अन्य स्थानों से आए कलाकार अपने लोक नृत्य की प्रस्तुति देते हुए चल रहे थे। ये दृश्य बहुत ही अद्भुत था। इनके अलावा और भी कलाकार सवारी में आगे लोगों का मनोरंजन करते हुए चल रहे थे। महाकाल की तीसरी सवारी में ही शाही सवारी का रूप नजर आया।

कब है बाबा महाकाल की शाही सवारी?

चौथी सवारी- 4 अगस्त
पांचवी सवारी- 11 अगस्त
छठी सवारी- 18 अगस्त (शाही सवारी)