Uttarkashi cloudburst today: उत्तराखंड के धराली गांव में मंगलवार को अचानक फटने से पूरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया। इस दौरान कईं घर बह गए। पुलिस प्रशासन राहत काम में जुटा हुआ है। यहां एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो पांडवकालीन बताया जाता है।

Kalp Kedar Temple History Dharali Village Uttarkashi: मंगलवार को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव में अचानक बादल फट गए। जिसके चलते पूरा गांव ही बाढ़ की चपेट में आ गया। इस बाढ़ में कई घर बह गए। इस घटना में कईं लोगों के मारे जाने की खबर है। धार्मिक दृष्टि से उत्तरकाशी का धराली गांव बहुत ही खास है। यहां कईं प्राचीन मंदिर भी हैं। इन्हीं में से एक है कल्प केदार मंदिर। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी।

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कहां है कल्प केदार मंदिर?

वैसे तो उत्तकाशी के धराली गांव में कईं प्रसिद्ध मंदिर हैं लेकिन इन सभी में कल्प केदार मंदिर का महत्व सबसे ज्यादा है। यहां से गंगोत्री सिर्फ 20 किमी दूर है। कहते हैं कि धराली में कभी 240 प्राचीन मंदिरों का एक समूह था जो समय के साथ नष्ट होते चले गए। वर्तमान में इन मंदिरों के अवशेष ही यहां दिखाई देते हैं। अब यहां कुछ ही प्राचीन मंदिर शेष हैं। इनमें से कल्प केदार मंदिर भी एक है।

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क्यों खास है धराली का कल्प केदार मंदिर?

कल्प केदार मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने की थी जब वे केदारनाथ आए थे। वर्तमान में यहां जो मंदिर दिखाई देता है वह भी लगभग 1500 साल पुराना है। सबसे खास बात ये है कि यहां जो शिवलिंग है वो एक 7 फीट कुंड के अंदर है। इसके दर्शनों के लिए पानी के अंदर जाना पड़ता है। और भी कईं बातें इस मंदिर को रहस्यमयी बनाती हैं।

यहां बहती है खीर गंगा नदी

धराली में बादल फटने से जिस नदी में बाढ़ आई है, उसका नाम खीर गंगा है। इस नदी का भी धार्मिक महत्व है। दूध से पानी होने के कारण इस नदी का नाम खीर गंगा पड़ा है। खीरगंगा नदी के मार्ग पर ही एक प्राचीन गुफा है। कहते हैं कि इसी स्थान पर भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तपस्या की थी। इसलिए इस जगह की धार्मिक मान्यता काफी ज्यादा है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।