World Blood Donor Day 2024: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर में बहते हुए रक्त पर भी ग्रहों के शुभ-अशुभ फल का प्रभाव होता है। ग्रहों की अशुभता के कारण ही किसी व्यक्ति को बार-बार खून से संबंधित बीमारी होती है। 

importance of blood in astrology: हर साल 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। रक्त यानी खून हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसके बिना कोई भी व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता है। अक्सर देखने में आता है कि कुछ लोगों को बार-बार रक्त से संबंधित बीमारी होती रहती है। ऐसे में वह व्यक्ति ये समझ ही नहीं पाता कि आखिर उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसका कारण बताया गया है। विश्व रक्तदान दिवस पर जानिए ज्योतिष में रक्त पर किस ग्रह का प्रभाव होता है…

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मंगल है रक्त का कारक
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे शरीर का हर अंग किसी न किसी ग्रह से संबंधित होता है। जब वो ग्रह अशुभ स्थिति में होता है तो उस अंग से संबंधित बीमारियां होने लगती हैं। ज्योतिष ग्रंथों में बताया गया है कि हमारे शरीर में जो रक्त है, उसका कारक मंगल ग्रह है। जब किसी की कुंडली में मंगल ग्रह अशुभ स्थिति में होता है तो उस व्यक्ति को अपने जीवन में कईं बार रक्त से संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

क्यों होती है बार-बार रक्त से संबंधित बीमारी?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, मंगल ग्रह रक्त के माध्यम से हमारे शरीर पर सीधे असर डालता है। जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में विपरीत ग्रह के साथ मंगल की युति बनती है मंगल अशुभ प्रभाव देने लगता है, जिसके कारण शरीर में रक्त की कमी हो जाती है या फिर इससे संबंधित और कोई बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

रक्तदान करने से क्या फायदे होते हैं?
ज्योतिषियों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो उस व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान जरूर करना चाहिए। इससे मंगल से संबंधित अशुभ फलों में कमी आ सकती है। ऐसा करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से भी सलाह जरूर लेना चाहिए।


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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।