India vs Zimbabwe Match: IND vs ZIM सुपर-8 मुकाबले से पहले चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में एक खास केमिकल को स्प्रे किया गया है। मैदान पर 80-90% नमी के बीच इस केमिकल को छिड़का जाना चर्चा में है। जानिए यह केमिकल क्या है और क्यों यूज किया गया है...

India vs Zimbabwe Super-8 Match Today: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में आज भारत और जिम्बाब्वे का बेहद रोमांचक मुकाबला है। यह मैच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। भारत के लिए यह मुकाबला 'मस्ट विन' जैसा है। टीम की सेमीफाइनल उम्मीदें पतली डोर से लटकी हैं। कप्तान सूर्यकुमार की टीम को अब बाकी दोनों मैच बड़े अंतर से जीतने ही होंगे और साथ में दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। जिम्बाब्वे के खिलाफ इस मैच से पहले मैदान पर एक खास केमिकल छिड़का गया है, जिसकी चर्चा तेज हो रही है। आइए जानते हैं यह केमिकल क्या है और इसे क्यों छिड़का गया है?

क्या है यह खास केमिकल?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चेपॉक में 'Dew Cure' नाम का केमिकल छिड़का गया है। इसे अमेरिका से मंगाया गया है। इसका मकसद रात के मैच में ओस का असर कम करना है। चेन्नई में इस समय नमी 80 से 90% तक रहने का अनुमान है। ऐसे में दूसरी पारी में गेंद गीली हो जाती है, आउटफील्ड फिसलन भरा हो जाता है और गेंदबाजों की पकड़ ढीली पड़ जाती है। यही वजह है कि स्टेडियम प्रबंधन ने इस बार ओस से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर ली है।

भारत-जिम्बाब्वे मैच में किसकी बढ़ेगी टेंशन?

सवाल उठ रहा है कि अगर केमिकल छिड़कने से ओस कम हुई, तो किस टीम को फायदा और किसे नुकसान होगा? एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर ओस कम हुई, तो स्पिनर्स को मदद मिल सकती है, गेंदबाज बेहतर कंट्रोल में रहेंगे और पहले बैटिंग करने वाली टीम को फायदा हो सकता है। अगर ओस फिर भी भारी पड़ी, तो चेज करने वाली टीम को फायदा हो सकता है। गीली गेंद से गेंदबाज परेशान हो सकते हैं और टॉस का रोल फिर बड़ा हो जाएगा। चेपॉक की पिच पर आमतौर पर स्पिनर्स का दबदबा रहता है। गेंद रुककर आती है, टर्न भी मिलता है. लेकिन ओस पड़ते ही गेंद फिसलने लगती है और बैटिंग आसान हो जाती है। मतलब यह केमिकल टॉस के असर को कम भी कर सकता है।

Dew Cure की वजह से रणनीति कैसे बदल सकती है?

अगर Dew Cure असरदार रहा, तो कप्तान पहले बैटिंग का रिस्क ले सकते हैं और स्पिनर्स बीच के ओवर में बड़ा रोल निभा सकते हैं। डेथ ओवर में यॉर्कर और स्लोअर गेंद ज्यादा असरदार रह सकती हैं। अगर असर कम रहा, तो रात की ओस फिर मैच का रुख तय कर सकती है।

भारत बनाम जिब्बावे मैच में टॉस बनेगा असली गेमचेंजर?

चेन्नई में नाइट मैच में कप्तान अक्सर चेज करना पसंद करते हैं। गीली गेंद से स्कोर डिफेंड करना मुश्किल हो जाता है, लेकिन इस बार अगर ओस पर कंट्रोल हो गया, तो टॉस का महत्व थोड़ा घट सकता है। यही वजह है कि यह प्रयोग चर्चा में है।

भारत पर दबाव क्यों ज्यादा?

भारत को सुपर-8 में पहले ही करारी हार मिली है। दूसरी तरफ जिम्बाब्वे भी 100 से ज्यादा रन से हार चुका है। दोनों टीमें दबाव में हैं। लेकिन भारत डिफेंडिंग चैंपियन है और उम्मीदें ज्यादा हैं। एक और गलती से कहानी यहीं खत्म हो सकती है।

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