सचिन से लारा तक...दुनिया के वो 5 दिग्गज कप्तान जो टीम के लिए साबित हुए अनलकी
Top 5 Unlucky Captain of Cricket: क्रिकेट में अपने देश के लिए कप्तानी करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। अब तक कई बड़े-बड़े सूरमाओं ने इसमें अपना दांव खेला है, लेकिन बदले में बेइज्जती के अलावा कुछ नहीं मिला। सभी आंकड़ों के ही बादशाह बनकर रह गए हैं।

5 अनलकी दिग्गज कप्तान
अब तक क्रिकेट के इतिहास में एक से बढ़कर एक धाकड़ कप्तानों ने अपना जलवा बिखेरा है।। एमएस धोनी से लेकर रिकी पोंटिंग जैसे कप्तानों ने विश्व क्रिकेट में झंडा गाड़ दिया। वहीं, कुछ ऐसे रहे, जो सिर्फ आंकड़े के बादशाह बनकर रह गए। यहां हम आपको उन 5 लीजेंड कप्तानों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने बतौर कप्तान बेइज्जती के अलावा कुछ नहीं हासिल किया है।
जो रूट
इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट का नाम लिस्ट में पहले नंबर पर आता है, जिन्हें एक समय कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई थी। इस खिलाड़ी का टेस्ट रिकॉर्ड बतौर कप्तान बेहद खराब रहा। एक दौर ऐसा भी आया, जब 17 मैचों में सिर्फ 1 जीत हासिल की। इनकी कप्तानी में टीम डिफेंसिव और डरी हुई बन गई। मैच फंसने पर कंधे झुक जाते थे और सारा भार रूट पर आता था। रूट के हटते ही बेन स्टोक्स आए और टीम अलग हो गई।
रिकी पोंटिंग
2003 और 2007 में वर्ल्ड कप जीतने वाले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग का असली सच कुछ और ही है। उन्होंने ऐसा इतिहास तब रचा, जब ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वॉर्न, मैथ्यू हेडन और पोंटिंग खुद जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे। लेकिन जैसे ही इन खिलाड़ियों ने रिटायरमेंट लेना शुरू किया, टीम का डाउनफॉल शुरू हो गया। 120 सालों में 3 एशेज हारने वाले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ही बने।
बाबर आजम
बाबर आजम की कप्तानी ने पाकिस्तान का बेड़ा गर्क कर दिया। उन्हें एक ऐसी टीम मिली थी, जो टी20 में नंबर वन बन सकती थी। उस टीम में शाहीन शाह अफरीदी, हरीस रऊफ और नसीम शाह जैसे खतरनाक गेंदबाज थे, लेकिन उनके गलत और डिफेंसिव अप्रोच ने सब बर्बाद कर दिया। जहां दुनिया 50 ओवर में 400 बना रही थी, वहीं दूसरी ओर बाबर की टीम 90 के दशक वाली बल्लेबाजी में लगी थी।
ब्रायन लारा
सूची में चौथे नंबर पर वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा का नाम आता है। टेस्ट में 400 रनों की पारी खेलने वाले लारा ने अपनी तीन की नैया डूबा दी। 90 के दशक में वेस्टइंडीज के पतन शुरू हुआ था, जिसमें लारा ने आग में घी डालने का काम कर दिया। 3 बार कप्तानी का मौका मिला, लेकिन रिजल्ट जीरो दिया। उनके अंदर टीम को साथ लेकर चलने की काबिलियत नहीं थी। वो अपने आप में एक दिग्गज बनकर रह गए।
सचिन तेंदुलकर
क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का नाम पांचवें नंबर पर है। विश्व में अपना परचम लहरा चुके सचिन कप्तानी में फेल साबित हुए हैं। 31 मार्च 1997 को भारत और वेस्टइंडीज के बीच मैच हो रहा था। टेस्ट में चौथी पारी में टीम इंडिया को 120 रन बनाने थे, लेकिन सचिन के धुरंधर 81 पर सिमट गई। इस हार के बाद सचिन 1 घंटे टॉयलेट में बैठकर रोए थे। 1996 से 2000 तक 25 टेस्ट में 4 और 1996 से 1999 तक वनडे में 73 में 23 जीत दिला पाए। वो सिर्फ आंकड़ों के शहंशाह बनकर रह गए।