राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साले और पूर्व सीएम राबड़ी देवी के भाई अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने तीन साल पुराने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के एक मामले में गोपालगंज में एमपी-एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया। यहां वे जज के आगे गिड़गिड़ाने लगे।

गोपालगंज. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साले और पूर्व सीएम राबड़ी देवी के भाई अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव की कभी बिहार में तूती बोलती थी। इनका सिर्फ नाम ही 'साधु' है, वैसे बिहार में 1990 के दशक में इनका खासा दबदबा था। लेकिन 2 जून का दिन कुछ इनके लिए एकदम उलट रहा। तीन साल पुराने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के एक मामले में साधु ने गोपालगंज में एसीजेएम-1 मानवेंद्र मिश्र की एमपी-एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया। इसमें पूर्व सांसद साधु को दोषी करार दिया गया है। उन पर ₹1000 का जुर्माना लगाया गया है।

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मॉडल कोड आफ कंडक्ट के उल्लंघन का मामला और लालू प्रसाद यादव के साले साधु यादव का दोष

अभियोजन पदाधिकारी(prosecuting officer) आनंद शंकर शर्मा ने मीडिया को बताया कि पूर्व सांसद अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने जज से गुहार लगाते हुए कहा कि आदर्श आचार संहिता का यह उनका पहला अपराध है, भविष्य में किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। वे हमेशा कानून का पालन करेंगे और एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यों निभाएंगे। साधु यादव ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए हाथ जोड़कर जज से माफी मांगी। बाद में कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए बरी कर दिया।

राबड़ी के भाई साधु यादव की क्राइम, 2020 विधानसभा चुनाव में क्या किया था

16 अक्तूबर 2020 को विधानसभा चुनाव के दौरान तब बसपा प्रत्याशी साधु यादव ने बगैर अनुमति के हजियापुर से मौनिया चौक तक जुलूस निकाला था। इस पर नगर थाने में सदर प्रखंड के सीओ विजय सिंह ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की FIR दर्ज करायी थी। पूर्व सांसद अपने अधिवक्ता मुस्ताक आजम के साथ कोर्ट में हाजिर होने पहुंचे थे।

लालू प्रसाद यादव के साले साधु यादव की माफियागीरी

यह 1990 के दशक की बात है। लालू-राबड़ी राज में साधु की पूरे बिहार में तूती बोलती थी। हालांकि दो साल पहले उन्होंने अपने अपने भांजे तेजस्वी और उनकी पत्नी रसेल को लेकर अंट-शंट बोल दिया था। इसे लेकर लालू उनसे नाराज हो गए थे।

बिहार में लालू-राबड़ी ने 1990 से लेकर 2005 तक शासन किया। इन 15 सालों में साधु यादव MLA से लेकर सांसद तक बने। हालांकि यह अलग बात है कि लालू का सबसे अधिक बदनामी साधु के कारण ही मिली।

साधु यादव का नाम बिहार के बाढ़ राहत घोटाले के आरोपी IAS गौतम गोस्वामी की असमय मौत में सामने आया था। तब उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। शिल्पी जैन मर्डर में भी वे CBI की जांच में फंसे थे। बिहार भवन में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) के एक छात्र पर हमले का मामला हो या राजनीति दंबगई, साधु यादव का नाम हर जगह आता रहा।

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