छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हो गई है। 16 से 30 अप्रैल तक लोग खुद पोर्टल पर अपनी जानकारी भर सकते हैं। सरकार ने इसे पारदर्शी और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बार लोगों को खुद अपनी जानकारी भरने का मौका दिया गया है। इसे “स्व-गणना” कहा जा रहा है, जिसकी शुरुआत 16 अप्रैल 2026 से हो गई है। सरकार का कहना है कि इससे जनगणना प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी बनेगी। साथ ही लोगों की सही जानकारी सीधे उनके द्वारा दर्ज की जा सकेगी।
मुख्य सचिव ने खुद किया स्व-गणना
रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में राज्य के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने खुद अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर इस प्रक्रिया की शुरुआत की। इस दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) श्री मनोज कुमार पिंगुआ और जनगणना निदेशक श्री कार्तिकेय गोयल समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। यह कदम लोगों को प्रेरित करने के लिए भी अहम माना जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा नागरिक इस सुविधा का इस्तेमाल करें।
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कब तक भर सकते हैं जानकारी
राज्य सरकार ने नागरिकों को 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक का समय दिया है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकता है। इसके लिए se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर आसानी से फॉर्म भरा जा सकता है।
क्या होगा इसके बाद
स्व-गणना की प्रक्रिया खत्म होने के बाद 1 मई से 30 मई 2026 तक जनगणना टीम घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा करेगी। प्रगणक हर घर में जाकर मकान से जुड़ी जानकारी, सुविधाएं और परिवार की बेसिक डिटेल्स दर्ज करेंगे। जिन लोगों ने पहले ही स्व-गणना कर ली होगी, उन्हें सिर्फ अपनी SE ID प्रगणक को बतानी होगी। मुख्य सचिव ने इसे जनगणना को आसान, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। इससे लोगों को खुद अपनी सही जानकारी देने का मौका मिलेगा और डेटा में गलती की संभावना भी कम होगी।
अगर स्व-गणना नहीं कर पाए तो क्या होगा
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन जानकारी नहीं भर पाता है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। 1 मई से 30 मई के बीच सरकारी टीम खुद आपके घर आएगी और सारी जानकारी दर्ज करेगी। सरकार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस सुविधा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें और देश के विकास में अपनी भागीदारी निभाएं। जनगणना सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे सरकार को योजनाएं बनाने और लोगों तक सही सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिलती है।
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