Mukhyamantri Swasth Bastar Abhiyan: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' स्वास्थ्य क्रांति का चेहरा बन गया है। इसके जरिए मलेरिया, टीबी और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की घर-घर जांच की जा रही है। हाल ही में 310 किमी लंबे सफल मेडिकल रेफरल और मौके पर ही आयुष्मान कार्ड वितरण जैसी घटनाओं ने प्रशासन की संवेदनशीलता को साबित किया है।

रायपुर/सुकमा: छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, लेकिन आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुंच रही हैं, जहां पहुंचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। 'मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान' आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है।

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घर-घर जाकर जांच और इलाज कर रहे डॉक्टर

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुंच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतजार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुंच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर इलाज के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अब वनांचल के लोगों को इलाज के लिए मीलों भटकना नहीं पड़ता, बल्कि अस्पताल खुद उनके घर तक पहुंच रहा है।

310 किलोमीटर से अस्पताल पहुंचाकर बचाई जिंदगी

हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुंचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुंचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया। यह घटना साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कोई भी दूरी बड़ी नहीं होती।

आयुष्मान भारत बन रहा मददगार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो। अब बस्तर का हर नागरिक गर्व से कह सकता है कि पैसे की कमी उसके इलाज में आड़े नहीं आएगी।

आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम

छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है। यह मेल न केवल बीमारियों को जड़ से मिटा रहा है, बल्कि हमारी प्राचीन विरासत को भी सहेज रहा है।

जमीनी स्तर पर बड़ा असर

अभियान के तहत सिर्फ गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया। पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।