Women Empowerment: कैसे दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाएं बनीं सफल उद्यमी? क्या हर्बल कारोबार से खुल गए करोड़ों की कमाई के रास्ते? कैसे मिला आयुष विभाग से लाखों का ऑर्डर? डोंगनाला का हरिबोल समूह अब पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना का असर अब ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने इस योजना के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज हर्बल उत्पाद निर्माण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का सफल उदाहरण बन चुका है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

दिहाड़ी मजदूरी से सफल हर्बल उद्यमिता तक पहुंचीं आदिवासी महिलाएं

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप 12 आदिवासी महिलाओं को मिलाकर हरिबोल स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया। समूह की सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं और सीमित आय के कारण परिवार चलाना मुश्किल होता था। लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया।

हर्बल उत्पाद निर्माण के लिए मिला विशेष प्रशिक्षण

स्थानीय क्षेत्रों में उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया। आयुर्वेद विशेषज्ञों और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा उन्हें हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण ने महिलाओं को नई पहचान और रोजगार का अवसर दिया।

त्रिफला चूर्ण से हर्बल फेस पैक तक, बाजार में बढ़ी मांग

प्रशिक्षण के बाद समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और टूथ पाउडर जैसे कई हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। बेहतर गुणवत्ता और प्रभावी उत्पादों के कारण इनकी मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर भी तेजी से बढ़ी।

आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर, समूह को हुआ लाखों का लाभ

हरिबोल स्वयं सहायता समूह को बड़ी सफलता तब मिली जब आयुष विभाग की ओर से उन्हें बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ हुआ। इसके बाद समूह की पहचान और विश्वसनीयता में काफी वृद्धि हुई और नए बाजारों तक पहुंच आसान हुई।

38.90 लाख रुपए की आय से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति

वित्तीय वर्ष 2024-25 में समूह ने करीब 38.90 लाख रुपए का लाभ और कमीशन अर्जित किया। इससे समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। अब महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के साथ परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

26.11 करोड़ रुपए की संचयी बिक्री से बनाई नई पहचान

वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रुपए की संचयी बिक्री दर्ज की है। यह उपलब्धि समूह की लगातार मेहनत, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और बेहतर विपणन रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।

हर सदस्य की वार्षिक आय पहुंची 1.7 लाख रुपए

इस योजना से जुड़ने के बाद समूह की प्रत्येक महिला सदस्य की वार्षिक आय लगभग 1.7 लाख रुपए तक पहुंच गई है। आर्थिक मजबूती के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति भी बढ़ी है।

ट्रायफेड और छत्तीसगढ़ शासन से मिला सम्मान

हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर हरिबोल स्वयं सहायता समूह को ट्रायफेड (TRIFED) और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए बनी प्रेरणा

डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज इस बात का उदाहरण बन गया है कि यदि शासन की योजनाओं, कौशल विकास और बाजार उपलब्धता का सही लाभ मिले तो आदिवासी महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। यह सफलता अब प्रदेश और देश के अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।