CAG रिपोर्ट के मुताबिक, DTC का घाटा बढ़कर 60,750 करोड़ हो गया है। बसों की संख्या घट रही है और 45% बसें पुरानी हो चुकी हैं। किराया न बढ़ना और महिलाओं को मुफ्त यात्रा घाटे का मुख्य कारण बताया गया है।

CAG Report on DTC: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली परिवहन निगम (DTC) का घाटा 2015-16 में 25,300 करोड़ रुपए से बढ़कर 2021-22 में लगभग 60,750 करोड़ रुपए हो गया है। DTC के बसों की संख्या घट रही है। इसके 45% बसें पुरानी हो गईं हैं। उनके चलते-चलते खराब होने का खतरा बहुत ज्यादा है।

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TOI की रिपोर्ट के अनुसार कैग ने DTC के काम करने के तरीके में कई गलतियों की ओर इशारा किया है। यह बसों के अपने बेड़े को बढ़ा नहीं सका है। बता दें कि कैग की यह रिपोर्ट उन 14 रिपोर्टों में से एक है, जिन्हें भाजपा सरकार मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में पेश करेगी। इसे आप सरकार ने विधानसभा में शेयर करने से मना कर दिया था।

2009 से नहीं बदला DTC के बसों का किराया, हो रहा घटा

कैग रिपोर्ट के अनुसार DTC को हो रहे घाटे की मुख्य वजह 2009 से किराया नहीं बढ़ाना है। DTC ने किराया बढ़ाने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन दिल्ली सरकार ने अनुमति नहीं दी। इसके साथ ही महिलाओं को बस में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने से बोझ और बढ़ गया। कैग ने बताया है कि सरकार के पास DTC को घाटे से निकालने की कोई व्यावसायिक योजना नहीं है।

डीटीसी की बसें हैं खस्ताहाल

बता दें कि डीटीसी की टूटी-फूटी बसें यात्रियों के दैनिक अनुभव का हिस्सा बन गई हैं। यह एक राजनीतिक मुद्दा भी रहा है। अरविंद केजरीवाल ने 2015 में वादा किया था कि डीटीसी के बसों की संख्या बढ़ाकर 10,000 की जाएगी।

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डीटीसी ने ठीक तरह से नहीं की रूट प्लानिंग

2007 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि डीटीसी के पास 11,000 बसों का बेड़ा होना चाहिए। 5 साल बाद दिल्ली कैबिनेट ने यह संख्या 5,500 तय की। कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2022 के अंत में डीटीसी के पास 3,937 बसों का बेड़ा था। इनमें से 1,770 पुरानी थीं। लो-फ्लोर बसें 10 साल से अधिक पुरानी थीं। इन्हें हटाया जाना है।

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