दिल्ली के धीरपुर में 1,668 करोड़ रुपये की लागत से डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का विश्वस्तरीय कैंपस तैयार होगा। छात्रों को आधुनिक हॉस्टल, रिसर्च सेंटर, 2500 सीटों का ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएं और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा।

दिल्ली की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी के धीरपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का अत्याधुनिक वर्ल्ड-क्लास कैंपस विकसित किया जाएगा। करीब 1,668 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कैंपस न केवल आधुनिक शिक्षा और शोध का केंद्र बनेगा, बल्कि हजारों छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।

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दिल्ली सरकार के मुताबिक, यह परियोजना प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन और राजधानी को शिक्षा एवं अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नए कैंपस में आधुनिक शैक्षणिक ढांचा, रिसर्च सुविधाएं और छात्र-हितैषी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

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छात्रों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

प्रस्तावित कैंपस में आधुनिक अकादमिक ब्लॉक, सेंट्रल लाइब्रेरी, प्रशासनिक भवन और रिसर्च एवं इनोवेशन सेंटर तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा लगभग 840 विद्यार्थियों के लिए आधुनिक छात्रावास, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर तथा समावेशी एवं छात्र-अनुकूल कैंपस विकसित किया जाएगा। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाया जाएगा। साथ ही 2,500 सीटों वाला भव्य ऑडिटोरियम विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी करेगा।

पर्यावरण और आधुनिक तकनीक पर रहेगा फोकस

परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए GRIHA 5-स्टार ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। ऊर्जा दक्षता, हरित क्षेत्र और आधुनिक तकनीक आधारित सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे यह कैंपस भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सके।

रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म

सरकार का मानना है कि यह नया कैंपस छात्रों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि रिसर्च, इनोवेशन और वैश्विक स्तर के अकादमिक सहयोग के नए अवसर भी देगा। आधुनिक प्रयोगशालाएं और शोध सुविधाएं छात्रों और शिक्षकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराएंगी।

राजधानी की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली की पहचान केवल प्रशासनिक राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख Education Hub के रूप में भी मजबूत होगी। इससे देशभर के छात्रों को आधुनिक और वैश्विक स्तर की शिक्षा का लाभ मिलेगा, जबकि उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में दिल्ली की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।