Mobile Game Addiction Turns Deadly: दिल्ली के नांगलोई में 10 वर्षीय बच्चे ने मोबाइल गेम की लत में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चा दिनभर मोबाइल पर गेम्स और यूट्यूब में व्यस्त रहता था। पुलिस जांच कर रही है कि यह कदम क्यों उठाया गया।

Delhi Child Suicide News: दिल्ली के नांगलोई से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने अभिभावकों और समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक 10 साल के बच्चे ने कथित तौर पर मोबाइल गेम की लत में आत्महत्या कर ली। बच्चा एमसीडी स्कूल का छात्र था और दोनों माता-पिता कामकाजी थे।

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क्या मोबाइल की लत ने छीना बच्चा या पीछे था कोई मानसिक तनाव? 

नांगलोई के अंबिका विहार कॉलोनी में रहने वाला यह बच्चा उस वक्त घर में अकेला था, जब उसकी मां और पिता काम पर गए हुए थे। बताया जा रहा है कि तेज़ बारिश के कारण उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। अकेलेपन में वह पूरे दिन मोबाइल पर व्यस्त रहा। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चा प्रतिदिन करीब 10 से 11 घंटे मोबाइल का उपयोग करता था, जिसमें से 7 घंटे वह गेम खेलता था और 4 घंटे यूट्यूब देखता था।

मोबाइल गेमिंग एडिक्शन-कब बनती है जानलेवा? 

क्या गेम में बार-बार हारना उसके लिए तनाव का कारण बन गया? पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या किसी गेमिंग लेवल को न पार कर पाने पर उसने ये घातक कदम उठाया? या फिर उसे माता-पिता द्वारा मोबाइल की लत को लेकर डांटा गया था?

क्या स्कूल प्रेशर या घर का डांट बन गया कारण? 

पुलिस यह भी जानने का प्रयास कर रही है कि कहीं स्कूल से किसी प्रकार का मानसिक दबाव या बुलींग तो नहीं हो रही थी। मानसिक तनाव, अकेलापन और मोबाइल की लत-इन सभी वजहों ने मिलकर कहीं मासूम को इतना बड़ा कदम उठाने पर तो मजबूर नहीं कर दिया?

घर पहुंचे तो टूटी दुनिया-लोहे के पाइप से लटक रहा था मासूम जब माता-पिता शाम को घर लौटे, तो उन्होंने जो देखा उससे उनकी दुनिया उजड़ गई। बच्चा लोहे के पाइप से दुपट्टे के सहारे लटका मिला। घटना के बाद पुलिस को सूचित किया गया, और तत्काल जांच शुरू हुई।

पुलिस जांच जारी-लेकिन सवाल समाज से भी

पुलिस ने बच्चे का मोबाइल ज़ब्त कर लिया है और साइबर सेल इसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर से समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बच्चों को डिजिटल डिवाइस देना अब एक खतरा बनता जा रहा है?

क्या करें अभिभावक?-सजग रहें, संवाद बढ़ाएं 

विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों में स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण, नियमित संवाद और डिजिटल डिटॉक्स की ज़रूरत अब बेहद ज़रूरी हो गई है। मोबाइल गेम अब सिर्फ टाइम पास नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। यह एक चेतावनी है कि हमें बच्चों की दुनिया को समझने की ज़रूरत है, उससे पहले कि वह हमेशा के लिए हमसे दूर हो जाएं।