दिल्ली सरकार ने 15 साल से पुराने 44 फ्लाईओवरों के स्ट्रक्चरल ऑडिट को मंजूरी दी है। 11 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा और मरम्मत की स्थिति जांची जाएगी।

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी के शहरी ढांचे को और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने 15 वर्ष से अधिक पुराने 44 फ्लाईओवरों और ग्रेड सेपरेटरों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मंजूरी दे दी है। इस कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को कंसल्टेंट नियुक्त करने हेतु 11 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

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यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार किसी संभावित दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले से ही रखरखाव और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दे रही है। दिल्ली के ये फ्लाईओवर रोजाना लाखों यात्रियों और वाहनों की आवाजाही का प्रमुख आधार हैं। इनमें से कई संरचनाएं वर्ष 1982 से 2010 के बीच बनाई गई थीं और लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण अब उनकी विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक हो गई है।

Flyover Safety Audit: यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर

PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली तेजी से विकसित हो रही है और ऐसे में शहर के बुनियादी ढांचे की मजबूती और सुरक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। कई फ्लाईओवर पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे हैं और हर दिन लाखों लोग इनका उपयोग करते हैं। ऐसे में 44 फ्लाईओवरों का वैज्ञानिक तरीके से ऑडिट कर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा ताकि किसी भी संभावित खतरे की पहचान समय रहते की जा सके।

मंत्री ने कहा कि यह केवल एक तकनीकी जांच नहीं बल्कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा, सुविधा और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में किया गया निवेश है। सरकार का लक्ष्य केवल नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नहीं, बल्कि मौजूदा संरचनाओं को भी सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना है।

PWD Project: कंसल्टेंट कंपनी करेगी विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन

स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार एक विशेषज्ञ कंसल्टेंट एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो सभी चयनित फ्लाईओवरों की संरचनात्मक स्थिति का विस्तृत अध्ययन करेगी। यह एजेंसी जांच करेगी कि किसी फ्लाईओवर में कोई तकनीकी कमजोरी या क्षति तो नहीं है और यदि मरम्मत की आवश्यकता है तो उसके लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाने चाहिए। कंसल्टेंट का चयन केंद्र सरकार के सामान्य वित्तीय नियम (GFR-2017) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।

Delhi Flyover List: किन-किन फ्लाईओवरों का होगा ऑडिट

यह ऑडिट कई चरणों में पूरा किया जाएगा। जिन प्रमुख फ्लाईओवरों और ग्रेड सेपरेटरों को इस सूची में शामिल किया गया है, उनमें आईपी एस्टेट रिंग रोड इंटरसेक्शन (1982), नांगिया पार्क-शक्ति नगर RUB (1990), नारायणा फ्लाईओवर (2010), मंगोलपुरी फ्लाईओवर (2008), लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर (2006), सराय काले खां फ्लाईओवर (2003), सफदरजंग (AIIMS) फ्लाईओवर (2003), DND फ्लाईओवर (2008), अफ्रीका एवेन्यू-अरुणा आसफ अली मार्ग फ्लाईओवर (2009), आजादपुर ग्रेड सेपरेटर (2010) और गाजीपुर फ्लाईओवर (2010) समेत कई महत्वपूर्ण ढांचे शामिल हैं।

Infrastructure Maintenance: शिकायतों के बाद कुछ फ्लाईओवर हुए शामिल

सूत्रों के अनुसार कुछ फ्लाईओवरों को उनकी मौजूदा स्थिति और रखरखाव से जुड़ी शिकायतों के आधार पर इस सूची में जोड़ा गया है। नारायणा फ्लाईओवर, मंगोलपुरी फ्लाईओवर और लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर को लेकर पहले शिकायतें सामने आ चुकी थीं। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एंड्रयूज गंज फ्लाईओवर को भी बाद में इस ऑडिट सूची में शामिल किया गया है।

Structural Audit Report: मरम्मत और भविष्य की योजना तय करेगी रिपोर्ट

कंसल्टेंट एजेंसी का दायित्व केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। उसे संरचनात्मक जांच, तकनीकी सर्वे, विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने, मरम्मत की अनुमानित लागत बताने और भविष्य में आवश्यक सुधार कार्यों के लिए तकनीकी सुझाव भी देने होंगे। परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भुगतान को विभिन्न चरणों से जोड़ा गया है। यानी काम की प्रगति के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा।

इस व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट से दिल्ली के पुराने फ्लाईओवर नेटवर्क की एक विस्तृत ‘हेल्थ रिपोर्ट’ तैयार होगी। इसके आधार पर सरकार यह तय कर सकेगी कि किन स्थानों पर तत्काल मरम्मत की जरूरत है और कहां भविष्य में सुधार कार्य किए जाने चाहिए। बढ़ते शहरी विस्तार और लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक के बीच इस पहल को सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।