दिल्ली के ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल से 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस हुआ है। करीब 100 एकड़ जमीन रिक्लेम होने से शहर को बड़ी राहत मिली है।
नई दिल्ली। दिल्ली के लिए सालों से परेशानी बने कूड़े के पहाड़ अब धीरे-धीरे छोटे हो रहे हैं। ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के तीन बड़े लैंडफिल साइट पर पुराने कचरे यानी Legacy Waste को हटाने और प्रोसेस करने का काम तेज हुआ है। दिल्ली सरकार के मुताबिक, इन तीनों साइट से अब तक करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है और लगभग 100 एकड़ जमीन को फिर से उपयोग के लिए मुक्त कराया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार के प्रयासों से वर्षों पुराने इस बोझ को हटाने का काम मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है।
Delhi Garbage Mountains: ओखला, भलस्वा और गाजीपुर में कितना कचरा हटाया गया?
दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल साइट ओखला, भलस्वा और गाजीपुर लंबे समय से राजधानी के लिए बड़ी चुनौती रहे हैं। यहां जमा पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने के लिए बायो-माइनिंग और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 31 अगस्त 2026 को सामने आए आंकड़ों के अनुसार, ओखला में करीब 70 लाख मीट्रिक टन, भलस्वा में करीब 102 लाख मीट्रिक टन और गाजीपुर में करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया गया है। इससे क्रमशः 35 एकड़, 45 एकड़ और 20 एकड़ जमीन मुक्त हुई है। कुल मिलाकर जमीन की रिक्लेमेशन करीब 100 एकड़ तक पहुंच गई है। यानी सिर्फ कचरे का ढेर कम करना ही लक्ष्य नहीं है। असली फायदा यह है कि शहर के बीचों-बीच सालों से कचरे के कब्जे में रही जमीन को दोबारा इस्तेमाल करने की संभावना बन रही है।
Delhi Landfill Cleanup: डेढ़ साल में तेजी से घटने लगे कूड़े के पहाड़
दिल्ली सरकार का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ साल में लैंडफिल साइट पर काम में तेजी आई है और कचरे के पहाड़ों का आकार घटने लगा है। हालांकि, यह काम अभी पूरा नहीं हुआ है। दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, तीनों साइट पर जमा Legacy Waste की मात्रा बहुत बड़ी रही है और पिछले वर्षों में भी बायो-माइनिंग के जरिए लगातार कचरा हटाया जाता रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक तीनों साइट से 74.11 लाख मीट्रिक टन Legacy Waste का निस्तारण किया गया था, जो उस समय तक एक साल में सबसे अधिक वार्षिक प्रगति थी। इससे साफ है कि लैंडफिल की सफाई एक लंबी प्रक्रिया है, लेकिन पिछले कुछ समय में इसकी रफ्तार बढ़ी है।
Okhla Landfill: 35 एकड़ जमीन हुई रिक्लेम
ओखला लैंडफिल साइट पर करीब 70 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया जा चुका है। इसके बाद करीब 35 एकड़ जमीन को मुक्त कराया गया है। ओखला दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित प्रमुख कचरा डंपिंग साइट में से एक है। यहां लंबे समय से जमा कचरे को हटाने के लिए बायो-माइनिंग और वैज्ञानिक प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। जमीन के खाली होने से भविष्य में इस क्षेत्र को बेहतर शहरी उपयोग के लिए विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
Bhalswa Landfill: 102 लाख टन कचरा प्रोसेस, 45 एकड़ जमीन मुक्त
भलस्वा में सफाई अभियान के तहत करीब 102 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया गया है। इससे करीब 45 एकड़ जमीन रिक्लेम हुई है। भलस्वा साइट की सफाई पर केंद्र सरकार भी लगातार नजर रख रही है। अगस्त 2026 में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने यहां चल रहे Legacy Waste Remediation कार्य की समीक्षा की थी। उस समय MCD ने बताया था कि 31 जुलाई 2026 तक भलस्वा में 99.07 लाख मीट्रिक टन Legacy Waste का निस्तारण हो चुका था। शेष कचरे को भी समयबद्ध तरीके से हटाने का लक्ष्य रखा गया था। इससे पता चलता है कि भलस्वा में कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है।
Ghazipur Landfill: 44 लाख टन कचरे से मिली 20 एकड़ जमीन
गाजीपुर लैंडफिल साइट से भी करीब 44 लाख मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस किया गया है। इससे करीब 20 एकड़ जमीन को रिक्लेम किया गया है। गाजीपुर दिल्ली के सबसे चर्चित कूड़े के पहाड़ों में शामिल रहा है। यहां कचरे के बड़े ढेर और उनसे जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियां लंबे समय से चर्चा में रही हैं। अब वैज्ञानिक तरीके से पुराने कचरे को अलग-अलग हिस्सों में प्रोसेस करने का काम किया जा रहा है।
Waste Processing से निकलने वाली सामग्री का भी होगा इस्तेमाल
कचरे की प्रोसेसिंग के बाद सिर्फ बेकार सामग्री ही नहीं निकलती। इसमें से प्राप्त Inert Material का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सामग्री का उपयोग सड़कों के निर्माण और निचले इलाकों की भराई जैसे कामों में किया जा रहा है।
इससे लैंडफिल की जमीन खाली करने के साथ-साथ प्रोसेस किए गए कचरे से उपयोगी सामग्री निकालने की संभावना भी बढ़ती है। कचरे में अलग-अलग तरह की सामग्री होती है, जिसमें RDF, Construction & Demolition Waste और Inert Waste जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं। पहले से ही दिल्ली में कुछ RDF को Waste-to-Energy संयंत्रों में इस्तेमाल किया जाता रहा है, जबकि कुछ प्रोसेस्ड सामग्री निर्माण कार्यों में उपयोग की जा सकती है।
Delhi Government का अगला लक्ष्य सिर्फ पुराने कचरे तक सीमित नहीं
दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को हटाने की चुनौती सिर्फ पुराने कचरे को साफ करने तक सीमित नहीं है। अगर रोज पैदा होने वाला नया कचरा वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस नहीं हुआ, तो खाली होती जमीन पर दोबारा दबाव बन सकता है। इसी वजह से सरकार और MCD की योजनाओं में Fresh Waste Processing और भविष्य की कचरा प्रबंधन जरूरतों को भी शामिल किया जा रहा है। अगस्त 2026 में भलस्वा की समीक्षा के दौरान केंद्र ने भी लैंडफिल साइट पर आने वाले नए कचरे की प्रोसेसिंग को तेज करने पर जोर दिया था। यानी चुनौती दो मोर्चों पर है- पुराने कचरे का पहाड़ हटाना और रोज निकलने वाले नए कचरे को दोबारा ऐसे पहाड़ में बदलने से रोकना।
Reclaimed Land: खाली हुई जमीन का इस्तेमाल कैसे होगा?
लैंडफिल की जमीन को रिक्लेम करना पहला चरण है। इसके बाद सवाल उठता है कि इस जमीन का इस्तेमाल किस तरह किया जाए। दिल्ली में पहले से तैयार योजनाओं में रिक्लेम की गई जमीन के एक हिस्से को हरित क्षेत्र, कचरा प्रोसेसिंग से जुड़ी सुविधाओं और दूसरे सार्वजनिक उपयोगों के लिए इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों में भी साफ किए गए लैंडफिल क्षेत्र के एक हिस्से में हरित क्षेत्र विकसित करने और बाकी हिस्से का इस्तेमाल ठोस कचरा प्रबंधन तथा अन्य उपयुक्त सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए करने की बात कही गई है। इसलिए 100 एकड़ जमीन की रिक्लेमेशन केवल आंकड़ा नहीं है। यह दिल्ली जैसे जमीन की कमी वाले शहर में भविष्य के लिए अतिरिक्त शहरी स्पेस तैयार करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है।
Delhi Garbage Mountains पर कार्रवाई से पर्यावरण को भी फायदा
कूड़े के विशाल पहाड़ केवल जमीन घेरने की समस्या नहीं हैं। इनसे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है। धूल, दुर्गंध, लीचेट और आग लगने जैसी घटनाएं लैंडफिल साइट से जुड़ी प्रमुख चिंताएं रही हैं। पुराने कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और साइट की रिक्लेमेशन से इन जोखिमों को धीरे-धीरे कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए केवल कचरा हटाना पर्याप्त नहीं होगा। रिक्लेम की गई जमीन का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल भी जरूरी रहेगा।
Delhi में 'कूड़े के पहाड़' हटाने की लड़ाई अभी जारी
दिल्ली सरकार के सामने उपलब्धि बड़ी जरूर है, लेकिन काम अभी खत्म नहीं हुआ है। तीनों प्रमुख साइट पर वर्षों से जमा कचरे की मात्रा बहुत अधिक रही है और उसे पूरी तरह हटाने में लगातार काम करना होगा। फिर भी ओखला, भलस्वा और गाजीपुर से करीब 2.16 करोड़ मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग और लगभग 100 एकड़ जमीन की रिक्लेमेशन यह बताती है कि दिल्ली के कूड़े के पहाड़ अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं हैं, बल्कि उन्हें हटाने की प्रक्रिया जमीन पर चल रही है। आगे की सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि इस गति को बनाए रखा जाए, पुराने कचरे के साथ नया कचरा भी वैज्ञानिक तरीके से संभाला जाए और खाली हुई जमीन का इस्तेमाल दिल्ली के नागरिकों के हित में किया जाए।


