झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी समन मामले में रांची कोर्ट में पेश होना है। जमीन घोटाले से जुड़े मामले में उनकी पेशी पर सबकी नजर है। क्या मुख्यमंत्री पेश होंगे या नहीं, यह देखना होगा।

रांची न्यूज: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रांची की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में पेश होना है। ईडी द्वारा भेजे गए समन की अनदेखी करने पर सोरेन को कोर्ट में पेश होने को कहा गया है। इससे पहले सीएम सोरेन ने कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक बार फिर मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। ईडी के समन उल्लंघन मामले में उन्हें आज बुधवार 4 दिसंबर को रांची की एमपी एमएलए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है। हालांकि इससे पहले सीएम सोरेन ने कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब देखना होगा कि सीएम सोरेन आज कोर्ट में पेश होते हैं या नहीं। पूरा मामला जमीन घोटाले से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला

जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हेमंत सोरेन को 10 बार तलब किया था, हालांकि, 8वें समन पर 20 जनवरी और 10वें समन पर 31 जनवरी को वे ईडी के समक्ष पेश हुए थे। ईडी ने आठ समन भेजने के मामले को समन की अवमानना ​​माना था।

जनवरी में ईडी ने सोरेन को किया था गिरफ्तार

हेमंत सोरेन 20 जनवरी को ईडी के समक्ष पेश हुए थे और फिर 31 जनवरी को पेश होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके बाद उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। आदेश के मुताबिक, हेमंत सोरेन को आज कोर्ट में पेश होना है, वहीं दूसरी ओर 5 दिसंबर को सोरेन सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार होना है। ऐसे में देखना होगा कि 4 दिसंबर यानी आज हेमंत सोरेन व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होते हैं या नहीं।

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था

ईडी ने हेमंत सोरेन के साथ ही अन्य के खिलाफ 5500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। झारखंड के मुख्यमंत्री सोरेन को 5 महीने तक जेल में रहना पड़ा था। ईडी के समन की अवहेलना के मामले की सुनवाई पहले सीजेएम कोर्ट में चल रही थी। 3 जून को सीजेएम कृष्णकांत मिश्रा ने इस मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। जहां सुनवाई के बाद 11 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। जिसका आदेश 26 नवंबर को जारी किया गया था।

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