मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा कर छह लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने, स्लीमनाबाद टनल और बड़ी परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 जून को मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास एवं जल संसाधन विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि किसानों तक समय पर सिंचाई सुविधा पहुंचाना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है।

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बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14 जिलों में कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इन परियोजनाओं के लोकार्पण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अगले छह माह के भीतर इन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा, जिससे लगभग 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचाई सुविधाओं से जुड़ जाएगी।

14 जिलों की सिंचाई परियोजनाओं का होगा लोकार्पण

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान जिन परियोजनाओं का लोकार्पण प्रस्तावित है, उनमें बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला सहित विभिन्न जिलों की सिंचाई परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से जनता को समर्पित करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को शीघ्र लाभ मिल सके।

केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना से बढ़ेगी सिंचाई और बिजली उत्पादन

बैठक में बताया गया कि केन-मंदाकिनी लिंक अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया गया है। इस परियोजना के माध्यम से 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित होगी। साथ ही 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन भी किया जा सकेगा। परियोजना के तहत 20 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 8,400 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

सिंहस्थ 2028 से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ महापर्व से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना में 66 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है। इसके अलावा शिप्रा नदी के तट पर लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण तेजी से चल रहा है। इस परियोजना में अब तक 60 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है, जिससे सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधाजनक स्नान व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सकेगी।

मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है सिंचित क्षेत्र

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सिंचित क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं का लाभ मिलने के बाद मध्यप्रदेश का सिंचित रकबा बढ़कर 95.45 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। यदि स्वीकृत अन्य परियोजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई सुविधाओं से जुड़ा है।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना में पुनर्वास कार्य तेज

बैठक में जानकारी दी गई कि केन-बेतवा अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को वार्षिक सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही 130 मेगावाट बिजली उत्पादन भी संभव होगा। परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन के लिए विशेष पैकेज के तहत अवार्ड जारी किए जा चुके हैं तथा लगभग 90 प्रतिशत भुगतान भी किया जा चुका है। इसके अलावा बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्यीय परियोजना में चकरपुर और मड़िया बांध का निर्माण पूरा हो चुका है। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों में 6.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

बैठक में वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त कारम बांध के पुनर्निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 से शुरू हुआ पुनर्निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने चतुर्थ बांध परियोजना (छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स) सहित अन्य परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

स्लीमनाबाद टनल से डेढ़ हजार गांवों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन की तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत निर्मित इस ट्रांस-वैली नहर प्रणाली के माध्यम से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1,500 गांवों की करीब ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

प्रदेश की सबसे अधिक 227 क्यूमेक जल वहन क्षमता वाली इस नहर से किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी इस टनल की जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है तथा इसका व्यास 10.140 मीटर है। करीब डेढ़ दशक से निर्माणाधीन यह परियोजना अब लगभग पूरी हो चुकी है और किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।