लद्दाख के न्योमा में -15°C तापमान के बीच 22,000 फीट की ऊंचाई से स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) का सफल परीक्षण हुआ। DRDO की इस उपलब्धि से भारतीय सेना की उच्च ऊंचाई वाली क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को मजबूती मिलेगी।
लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों में भारतीय रक्षा तकनीक ने एक और अहम उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि डीआरडीओ द्वारा विकसित मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) का न्योमा में सफल परीक्षण किया गया है। यह परीक्षण ऐसे समय हुआ, जब तापमान करीब -15 डिग्री सेल्सियस था और पैराशूट सिस्टम को 22,000 फीट की ऊंचाई से आजमाया गया।
22 हजार फीट की ऊंचाई पर हुआ परीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुताबिक, स्वदेशी एमसीपीएस का परीक्षण लद्दाख के न्योमा में किया गया। अत्यधिक ऊंचाई, कम तापमान और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हुआ यह परीक्षण भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इतनी ऊंचाई पर पैराशूट सिस्टम का सफल प्रदर्शन इसकी क्षमता और विश्वसनीयता को दर्शाता है।
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पैराशूट से लेकर ऑक्सीजन सिस्टम तक स्वदेशी तकनीक
एमसीपीएस को स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। इसमें पैराशूट सिस्टम के साथ ऑक्सीजन सिस्टम समेत जरूरी तकनीकी क्षमताओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैन्य अभियानों के दौरान जवानों की जरूरतों के अनुरूप एक सक्षम और भरोसेमंद प्रणाली उपलब्ध कराना है।
आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक का लगातार विकास देश की सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने इस सफल परीक्षण के लिए केंद्र सरकार और डीआरडीओ को बधाई दी।
लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए उपकरणों की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में एमसीपीएस का यह परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और सेना की उच्च-ऊंचाई वाली परिचालन क्षमता, दोनों के लिहाज से अहम कदम माना जा सकता है।
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