Emotional Mystery From Indore: असहनीय दर्द से जूझती शिक्षिका ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु मांगी और ₹1.5 करोड़ की संपत्ति 6 गरीब स्कूली बच्चों के नाम कर दी। क्यों? क्योंकि बच्चों को ही बनाया अपना परिवार।

Emotional Teacher Story Indore: इंदौर की सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका चंद्रकांता जेठवानी का नाम इन दिनों हर ओर चर्चा में है। ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा जैसी दुर्लभ और गंभीर हड्डियों की बीमारी से जूझती यह महिला न केवल अपनी तकलीफ झेल रही हैं, बल्कि उन्होंने एक ऐतिहासिक निर्णय लेकर सबको चौंका दिया।

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शिक्षिका ने संपत्ति छह स्कूल बच्चों के नाम-पर क्यों? 

चंद्रकांता ने अपनी पूरी संपत्ति- लगभग ₹1.5 करोड़, जिसमें मकान, बैंक बैलेंस और अन्य संसाधन शामिल हैं- अपने स्कूल के 6 ए ग्रेड विद्यार्थियों के नाम कर दी। ये सभी बच्चे गरीब परिवारों से हैं। उनके अनुसार, “मेरे कोई परिवार नहीं है, लेकिन इन बच्चों में मैंने अपना भविष्य देखा।”

राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग- गरिमा से विदाई की ख्वाहिश

शिक्षिका ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर "इच्छा मृत्यु (Mercy Killing)" की मांग की है। वह कहती हैं, "हर दिन असहनीय पीड़ा में जीती हूं। आत्महत्या नहीं करूंगी, क्योंकि मैंने बच्चों को हमेशा जीना सिखाया है। लेकिन अब शरीर ने साथ देना छोड़ दिया है।"

चंद्रकांता जेठवानी कौन हैं और उन्होंने संपत्ति क्यों दान की?

इंदौर की सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका हैं। उन्होंने अपने छात्रों को जीवन का उत्तराधिकारी बनाया क्योंकि वे उन्हें अपना परिवार मानती हैं।

चंद्रकांता जेठवानी की बीमारी क्या है? 

 चंद्रकांता जेठवानी ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा नामक हड्डियों की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें हड्डियां बार-बार टूटती हैं और बेहद दर्द होता है।

शिक्षिका ने इच्छा मृत्यु क्यों मांगी?

शिक्षिका के अनुसार, शरीर ने साथ छोड़ दिया है। अकेलापन और दर्द से जूझते हुए वे गरिमा के साथ अंतिम विदाई चाहती हैं।

क्या डॉक्टर की गलती से हालत और बिगड़ी? 

शिक्षिका ने इंदौर के एक ऑर्थोपेडिक सर्जन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई।

व्हीलचेयर पर बैठकर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई 

चंद्रकांता रोज़ाना 8 घंटे व्हीलचेयर पर रहती हैं, फिर भी बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाती हैं। उनका कहना है कि "मैंने बच्चों को उम्मीद दी है, खुद हार नहीं मान सकती।" दूसरों को भी सीख देती रहीं कि “हालात चाहे जैसे भी हों, इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए।”

बच्चों को उत्तराधिकारी कैसे बनाया गया? 

उन्होंने विधिवत रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर 6 बच्चों के नाम अलग-अलग वसीयत तैयार करवाई है। पैसे तब दिए जाएंगे जब बच्चे 18 साल के हो जाएंगे- ताकि कोई कानूनी अड़चन न हो।

क्या बीमारी ने छीन लिया जीने का हक? 

चंद्रकांता रोज़ाना 8 घंटे व्हीलचेयर पर बिताती हैं। शरीर का निचला हिस्सा पैरालाइज़ हो चुका है। उन्होंने एक ऑर्थोपेडिक सर्जन पर आरोप लगाया है कि उसकी एक दवा से उनका शरीर खिंच गया और कंधे से हाथ टूट गया। नतीजा ये हुआ कि अब चलना-फिरना लगभग असंभव हो गया है। चंद्रकांता जेठवानी कहती हैं, "मैं आत्महत्या नहीं करूंगी, क्योंकि मैं बच्चों को जीने और आत्मविश्वास की सीख देती हूं। लेकिन अब शरीर जवाब दे चुका है। इसलिए गरिमा के साथ अलविदा कहना चाहती हूं।" 

शिक्षिका की क्या है अंतिम इच्छा?

शिक्षिका ने लिखा -“मेरे अंग कोहिनूर हीरे से कीमती हैं। अगर मेरी मृत्यु के बाद कोई मेरी आंखों से दुनिया देख सके, तो मेरी ज़िंदगी सार्थक हो जाएगी।