जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजगढ़ पहुंचे। उन्होंने पूजा-अर्चना, पौधरोपण, ट्राइसाइकिल और ई-वाहन वितरण के साथ जनभागीदारी को अभियान की सफलता का आधार बताया।
भोपाल/राजगढ़। मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन 30 जून को होने जा रहा है। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को राजगढ़ जिले के भैंसवामाता क्षेत्र पहुंचे। यहां उन्होंने पवित्र दूध तलैया में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भैंसवामाता तथा माता बिजासन से प्रदेश की सुख-समृद्धि, जनकल्याण और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को पर्यावरण संरक्षण और हरित भारत का संदेश भी दिया।

भैंसवामाता मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण कार्यों की ली जानकारी
राजगढ़ प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भैंसवामाता मंदिर के प्रस्तावित स्वरूप का अवलोकन किया। उन्होंने मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़े प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने परिसर में पौधरोपण भी किया और लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने का आह्वान करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक स्वागत ने बनाया दौरा खास
मुख्यमंत्री के आगमन पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत किया। मंदिर के प्रवेश द्वार पर आदिवासी नृत्य दल ने उत्साह और उमंग के साथ रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। वहीं, बालिकाओं ने सिर पर कलश धारण कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण देखने को मिला।
दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल और लखपति दीदी समूहों को मिले इलेक्ट्रिक वाहन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरित कर उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए लखपति दीदी समूहों को 11 इलेक्ट्रिक वाहनों का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
ईको ब्रिक्स मॉडल की सराहना, जनभागीदारी को बताया सफलता की कुंजी
मुख्यमंत्री ने ब्यावरा की पर्यावरण प्रेमी संरक्षण समिति द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट से तैयार किए जा रहे ईको ब्रिक्स (Eco Bricks) की सराहना की। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियान तभी सफल हो सकते हैं, जब आम जनता सक्रिय रूप से इसमें भागीदारी निभाए। जनसहभागिता ही ऐसे अभियानों की सबसे बड़ी ताकत है।


