मध्य प्रदेश की उदयगिरि, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल मंदिर समूह UNESCO की Tentative List में शामिल हुए, CM मोहन यादव ने खुशी जताई।

भोपाल। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मिला है। उदयगिरि गुफाएं, बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह को यूनेस्को की विश्व धरोहर की Tentative List यानी अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इन चारों स्थलों को भारत की ओर से 8 जुलाई 2026 को सूची के लिए प्रस्तुत किया गया था।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और इसे मध्य प्रदेश की पुरासंपदा के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने पहचान मिल रही है और इसी क्रम में मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को भी वैश्विक मंच पर जगह मिल रही है।

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मध्य प्रदेश की 4 धरोहरों को UNESCO की अस्थायी सूची में जगह

यूनेस्को की Tentative List में शामिल चारों स्थल मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं। इनमें विदिशा की उदयगिरि गुफाएं, धार की बाघ गुफा चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला और मुरैना क्षेत्र का बटेश्वर-पदावली-ककनमठ मंदिर समूह शामिल है।

इन चारों धरोहरों की अपनी अलग ऐतिहासिक और स्थापत्य पहचान है। एक तरफ उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धार्मिक और शिल्प परंपरा की अहम कड़ी हैं, तो बाघ गुफाएं अपनी भित्ति चित्रकला के लिए जानी जाती हैं। गिन्नौरगढ़ मध्य भारत के गोंड इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण किला है और चंबल घाटी का मंदिर समूह मध्यकालीन मंदिर स्थापत्य की परंपरा को सामने रखता है।

Udayagiri Caves: गुप्तकाल की अनमोल विरासत

विदिशा की उदयगिरि गुफाएं मध्य प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन धरोहरों में गिनी जाती हैं। यूनेस्को के रिकॉर्ड के मुताबिक यहां करीब 20 शैल-कट गुफाएं हैं, जिनमें मूर्तियां, शिलालेख और धार्मिक स्थापत्य के विभिन्न प्रमाण मिलते हैं। यह स्थल मुख्य रूप से गुप्तकाल, खासकर चौथी-पांचवीं शताब्दी के दौर से जुड़ा है।

उदयगिरि की पहचान यहां मौजूद प्रसिद्ध वराह प्रतिमा से भी है। गुफाओं का पूरा परिसर धार्मिक प्रतीकों, मूर्तिकला, शिलालेखों और प्राकृतिक भू-दृश्य के मेल का उदाहरण है। यूनेस्को ने इसे भारतीय धार्मिक वास्तुकला के विकास के एक महत्वपूर्ण चरण से जोड़ते हुए Tentative List में शामिल किया है।

Bagh Cave Paintings: चित्रों में दिखाई देती है पुरानी दुनिया

धार जिले की बाघ गुफाओं की चित्रकारी मध्य प्रदेश की प्राचीन कला परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां की भित्ति चित्रकला में तत्कालीन धार्मिक और सामाजिक जीवन के साथ-साथ संगीत, नृत्य और दरबारी दृश्यों की झलक मिलती है। यूनेस्को की भारत संबंधी Tentative List में Bagh Cave paintings को 8 जुलाई 2026 की प्रविष्टि के तौर पर दर्ज किया गया है। इन चित्रों की खासियत यह है कि इनमें प्राचीन भारतीय चित्रकला की परंपरा और स्थानीय कलात्मक शैली का मेल दिखाई देता है। यही वजह है कि बाघ गुफाएं मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की चर्चा में खास स्थान रखती हैं।

Ginnorgarh Fort: गोंड इतिहास और स्थापत्य की कहानी

सीहोर जिले में स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य भारत के गोंड इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। यूनेस्को के अनुसार यह गढ़ा गोंड शासन के दौरान एक प्रमुख किलेबंद राजधानी और प्रशासनिक केंद्र के रूप में काम करता था। यह किला रातापानी क्षेत्र के पहाड़ी भू-दृश्य के बीच स्थित है, जहां प्राकृतिक ढलानों, खाइयों और वन क्षेत्र को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया था। गिन्नौरगढ़ की अहमियत सिर्फ इसके किलेबंदी ढांचे तक सीमित नहीं है। यह मध्य भारत में गोंड शासन, राजनीतिक व्यवस्था और पहाड़ी किला वास्तुकला को समझने का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

Chambal Valley Temple Group: मंदिर स्थापत्य की विरासत

मुरैना क्षेत्र का बटेश्वर-पदावली-ककनमठ मंदिर समूह भी इस सूची में शामिल हुआ है। यूनेस्को इसे Group of Temples of the Chambal Valley: Bateshwar, Padavali and Kakarmath के नाम से दर्ज करता है। यह मंदिर समूह मध्य भारत की प्रारंभिक मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला को समझने में अहम है। बटेश्वर और पदावली के मंदिरों की स्थापत्य शैली और ककनमठ की विशिष्ट संरचना चंबल क्षेत्र की समृद्ध पुरातात्विक विरासत को सामने लाती है।

UNESCO Tentative List में शामिल होना क्या मायने रखता है?

यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। Tentative List में शामिल होना UNESCO World Heritage List में अंतिम रूप से शामिल होना नहीं है। यह किसी स्थल को विश्व धरोहर के तौर पर नामांकन की दिशा में एक शुरुआती और महत्वपूर्ण चरण होता है। यूनेस्को के मुताबिक Tentative List उन संपत्तियों की सूची है जिन्हें संबंधित देश भविष्य में विश्व धरोहर के नामांकन के लिए विचार कर सकता है। भारत की UNESCO Tentative List में सितंबर 2026 तक 78 स्थल दर्ज हैं। 2026 में मध्य प्रदेश की ये चार नई प्रविष्टियां भी इसमें जुड़ी हैं।

CM मोहन यादव बोले- विरासत के संरक्षण का संकल्प मजबूत करें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि मध्य प्रदेशवासियों को अपनी विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों को विश्व स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान मिल रही है। मध्य प्रदेश की इन धरोहरों का UNESCO की अस्थायी सूची में पहुंचना इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।

अब आगे की चुनौती इन धरोहरों के संरक्षण, बेहतर प्रबंधन और उनकी ऐतिहासिक विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की होगी। वैश्विक पहचान के साथ इन स्थलों के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इसी संरक्षण और संवर्धन के संकल्प को मजबूत करने की अपील की है।