Morena Divya Sikarwar Murder: मुरैना में पिता ने बेटी की गोली मारकर हत्या की, शव को नदी में फेंक दिया। 23 लोगों का नाम सामने आया। क्या यह सिर्फ पारिवारिक विवाद था या इसमें कोई बड़ी साजिश छिपी है?

Divya Sikarwar Murder Case: मुरैना में एक बेहद ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। 17 साल की दिव्या सिकरवार को उसके पिता भरत ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस जांच में सामने आया कि मां गुड़िया और नाबालिग भाई भी इस घटना में शामिल थे। हत्या के बाद परिवार ने शव को ठिकाने लगाने और सबूत मिटाने में दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद ली। अब तक पुलिस ने 11 नामजद और 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

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हत्या का कारण: प्रेम प्रसंग या परिवार की इज्जत?

दिव्या 12वीं कक्षा की छात्रा थी और उसका किसी अन्य समाज के लड़के से प्रेम संबंध था। जब पिता को इसका पता चला, तो उसने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन दिव्या ने अपने प्रेम संबंध को नहीं छोड़ा। 22 सितंबर को पिता ने उसे पिटाई की, और 23 सितंबर की शाम परिवार ने हत्या की साजिश को अंजाम दिया।

रात का भयावह खेल: शव को नदी तक कैसे पहुंचाया गया?

23 सितंबर की रात 7.30 बजे माता की आरती चल रही थी। पिता और दिव्या में झगड़ा हुआ और गुस्से में भरत ने उसे गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर मां और भाई कमरे में आए। परिवार ने पड़ोसी दीपक सिकरवार को बुलाया और दिव्या के शव को अस्पताल से गांव की तरफ ले जाने में मदद लेने का निर्णय किया।

कौन-कौन था इस घटना में शामिल?

  1. भरत सिकरवार (पिता)-गोली मारी और शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
  2. गुड़िया सिकरवार (मां)-खून से सना फर्श साफ किया।
  3. दीपक सिकरवार (पड़ोसी)- शव को कार से गांव तक ले जाने में मदद।
  4. घंसू, संता, सुनील, सोनू और मंगल-शव को नदी तक ले जाने में सहायता।
  5. चीमा राठौड़ और फूफा यदुवीर-शव को गांव तक ले जाने में शामिल।
  6. गुड्डा बघेल (ट्रैक्टर मालिक)-ट्रैक्टर से शव को क्वारी नदी तक पहुंचाया।

शव को नदी में फेंकने का डरावना खेल

रात साढ़े दस बजे दिव्या का शव गांव के ग्राम भगवान सिंह के पुरा तक ले जाया गया। वहां पहले से इंतजार कर रहे अन्य लोग भी इस घातक खेल में शामिल थे। शव पर बड़े-बड़े पत्थर बांधकर उसे क्वारी नदी में फेंक दिया गया।

कब खुला यह रहस्य?

27 सितंबर को एक अज्ञात पड़ोसी ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और पिता भरत को हिरासत में लिया। उसने अपना गुनाह कबूल कर दिया। 28 सितंबर को नदी से शव बरामद किया गया। एससीआरएफ और एफएसएल टीम ने 18 घंटे लगातार तलाश के बाद शव को बरामद किया।

घटना की टाइमलाइन

  • 22 सितंबर: दिव्या और उसका प्रेमी स्कूटी पर घूमते हुए दिखे। पिता ने पिटाई की और हत्या की योजना बनाई।
  • 23 सितंबर शाम 7.30 बजे: माता की आरती के दौरान पिता ने बेटी को गोली मार दी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई गई।
  • 23 सितंबर रात 10.30 बजे: दिव्या के शव को गांव के भगवान सिंह के पुरा ले जाकर पत्थर बांधकर क्वारी नदी में फेंक दिया गया।
  • 27 सितंबर: एक अज्ञात पड़ोसी ने पुलिस को कॉल कर घटना की जानकारी दी।
  • 28 सितंबर: पुलिस और एससीआरएफ की मदद से 18 घंटे के रेस्क्यू के बाद दिव्या का शव क्वारी नदी से बरामद हुआ।
  • 30 सितंबर: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई।

किसने मदद की शव को ठिकाने लगाने में? 

घटना में कई लोग शामिल थे। दीपक सिकरवार ने शव को कार से ले जाने में मदद की। घंसू, संता, सुनील, सोनू और मंगल ने शव को नदी तक ले जाने में सहायता की। चीमा राठौड़ और यदुवीर फूफा ने शव को गांव तक पहुंचाने में मदद की। ट्रैक्टर मालिक गुड्डा बघेल ने शव को ट्रैक्टर में नदी तक पहुँचाया।

क्या यह सिर्फ परिवारिक विवाद था या साजिश? 

पुलिस के अनुसार, हत्या प्रेम प्रसंग के कारण की गई थी। पिता ने बेटी के प्रेम संबंध को मंजूरी न मिलने की वजह से हत्या की और शव को नष्ट करने की योजना बनाई। घटना में कुल 23 लोगों की भूमिका सामने आई।

पोस्टमार्टम और अपराध का खुलासा

30 सितंबर को ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दिव्या की हत्या गोली मारकर हुई थी। पिता-पिता ने अपराध कबूल किया। अब पुलिस सभी 23 आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।