मध्य प्रदेश को देश का बड़ा औद्योगिक और निवेश केंद्र बनाने की तैयारी है। BHAVYA योजना के तहत 9,047 एकड़ में 11 औद्योगिक पार्क प्रस्तावित हैं। 8,144 करोड़ रुपये की DPR लागत वाली परियोजनाओं से निवेश और रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।
संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश में सामाजिक समरसता और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 18 अगस्त को भोपाल के रवींद्र भवन से प्रदेशव्यापी 'श्री गुरु रविदास समरसता संकल्प अभियान एवं कलश यात्रा' का शुभारंभ करेंगे। सुबह 11 बजे होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में अलग-अलग जिलों के लिए पावन कलश रवाना किए जाएंगे। इसके बाद अभियान प्रदेश, जिला और ग्राम स्तर तक पहुंचेगा। सरकार का फोकस संत रविदास के समता, भक्ति, सेवा, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को लोगों तक पहुंचाने पर है।
20 अगस्त से जिला स्तर पर शुरू होगा कलश रथ का सफर
अभियान के तहत 20 अगस्त को सभी जिला मुख्यालयों पर कलश वंदन और सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद पावन कलशों को कलश रथ के जरिए स्थानीय रविदास मंदिरों और गांवों तक ले जाया जाएगा। प्रदेश के प्रत्येक जिले में 20 अगस्त से 10 सितंबर के बीच निर्धारित मार्ग पर कलश रथ यात्राएं निकाली जाएंगी।
इस दौरान सिर्फ यात्रा ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में सामूहिक आरती, गुरुवाणी पाठ, भजन संध्या और समरसता संकल्प जैसे आयोजन शामिल होंगे। स्थानीय संतों, गुरुओं, समाज के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की योजना है।
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अक्टूबर-नवंबर में निकलेगी बड़ी समरसता यात्रा
अभियान का अगला बड़ा चरण 5 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच होगा। इस दौरान श्री गुरु रविदास महाराज समरसता यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा डेरा सचखंड, बल्लन (जालंधर) से शुरू होकर मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गुजरेगी। यात्रा के प्रमुख पड़ावों पर स्वागत कार्यक्रमों के साथ समरसता संकल्प और समरसता गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी।
कार्यक्रमों में संत रविदास के समता, सेवा, सामाजिक न्याय और 'बेगमपुरा' के आदर्श समाज से जुड़े विचारों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य इन संदेशों को सामाजिक संवाद और जनभागीदारी से जोड़ना है।
18 से 31 अगस्त तक संत संपर्क कार्यक्रम
अभियान के शुरुआती चरण में 18 से 31 अगस्त तक संत संपर्क कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। इसके तहत संतों और गुरुओं को अभियान के उद्देश्य और प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें सामाजिक समरसता से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अभियान का नोडल और समन्वयकर्ता विभाग अनुसूचित जाति कल्याण विभाग रहेगा। जनजातीय जिलों में जनजातीय कार्य विभाग की भूमिका रहेगी। वहीं शहरी क्षेत्रों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग आवश्यक व्यवस्थाएं संभालेंगे।
सरकार ने अलग-अलग विभागों को दी जिम्मेदारी
अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने के लिए कई विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग और जन अभियान परिषद जन-जागरूकता तथा जनभागीदारी बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियां संचालित करेंगे।
वहीं संस्कृति विभाग अभियान से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन, समन्वय और संयोजन की जिम्मेदारी संभालेगा। इस पूरे अभियान का मकसद केवल गुरु रविदास की 650वीं जयंती मनाना नहीं, बल्कि उनके विचारों को सामाजिक संवाद से जोड़ना भी है। आने वाले दिनों में कलश यात्राओं, स्थानीय आयोजनों और अक्टूबर-नवंबर की समरसता यात्रा के जरिए यह अभियान मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचेगा।
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