MP News: क्या इंदौर मेट्रो की लागत बढ़ने से विकास को नई गति मिलेगी? क्या 94 गांवों के पुनर्वास से वन्यजीव संरक्षण मजबूत होगा? क्या आउटसोर्स मॉडल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बदल जाएंगी? क्या जनजातीय शिक्षा और श्रमिक कल्याण को मिलेगा बड़ा फायदा? मोहन यादव कैबिनेट ने 24,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी देकर बड़ा संदेश दिया है।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 16 जून को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, वन संरक्षण, शिक्षा और श्रमिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के लिए 24 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की।

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Indore Metro Project: इंदौर मेट्रो की लागत बढ़कर पहुंची 19,472 करोड़ रुपये

कैबिनेट ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। परियोजना की मूल स्वीकृत लागत 7,500.80 करोड़ रुपये थी, जिसमें 5,388.58 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत जोड़ी गई है। इसके बाद परियोजना की संशोधित लागत 12,889.38 करोड़ रुपये हो गई है।

इसके अलावा पीपीपी मॉडल, आंतरिक ऋण और अन्य वित्तीय व्यवस्थाओं को शामिल करते हुए 6,582.91 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्त पोषण को भी मंजूरी दी गई है। इस प्रकार परियोजना के लिए कुल 19,472.29 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। अतिरिक्त वित्त पोषण में केंद्र और राज्य सरकार की अतिरिक्त इक्विटी, अधीनस्थ ऋण, बैंक ऋण, राज्य करों से संबंधित सहायता तथा आईडीसी लागत से जुड़े वित्तीय प्रावधान शामिल हैं।

Project Tiger and Elephant: वन्यजीव संरक्षण के लिए 2,381 करोड़ रुपये स्वीकृत

वन विभाग के अंतर्गत संचालित प्रोजेक्ट टाइगर एवं एलिफेंट तथा ग्राम पुनर्वास से जुड़ी मुआवजा योजना के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक कुल 2,381.15 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इनमें से 1,131.15 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट टाइगर एवं एलिफेंट की विभिन्न गतिविधियों के लिए स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि का उपयोग टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्यजीव संरक्षण, आवास सुधार, अग्नि सुरक्षा, जल स्रोत विकास, वन मार्गों के रखरखाव, हाथियों की सुरक्षा, रेस्क्यू सामग्री खरीद और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जाएगा।

Village Rehabilitation Scheme: 94 गांवों के पुनर्वास के लिए 1,250 करोड़ रुपये

संरक्षित वन क्षेत्रों के भीतर स्थित संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के लिए मुआवजा योजना के तहत 1,250 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और ऐसे गांवों को संरक्षित क्षेत्रों के बाहर बसाना है जो वन्यजीव संरक्षण में बाधा बन रहे हैं। योजना के तहत ग्रामीणों की संपत्तियों का अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा। यह योजना संजय, सतपुड़ा, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के कुल 94 गांवों में लागू होगी।

Labour Welfare Schemes: श्रमिक कल्याण योजनाओं के लिए 531 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर

कैबिनेट ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए 531.78 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए निर्धारित की गई है। इसमें श्रम आयुक्त कार्यालय संचालन, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम कल्याण निधि, बाल श्रमिक पुनर्वास, बंधुआ मजदूर पुनर्वास, असंगठित श्रमिकों के राष्ट्रीय डेटाबेस और प्रवासी श्रमिक आयोग जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव और अन्य पूंजीगत मदों के लिए भी अलग से राशि स्वीकृत की गई है।

Local Fund Audit Department: स्थानीय निधि संपरीक्षा संचालन के लिए 492 करोड़ रुपये

वित्त विभाग के अंतर्गत संचालनालय स्थानीय निधि संपरीक्षा की योजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 492.45 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस राशि में 491.75 करोड़ रुपये स्थानीय निकायों के लेखा परीक्षण और संबंधित प्रशासनिक कार्यों के लिए तथा 70 लाख रुपये विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए स्वीकृत किए गए हैं। यह संचालनालय प्रदेश की विभिन्न स्थानीय संस्थाओं के लेखों की जांच और वेतन एवं पेंशन संबंधी मामलों का निराकरण करता है।

Mega Health Infrastructure Policy: मेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर नीति पर बनेगी उपसमिति

राज्य में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रस्ताव पर अध्ययन के लिए पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की गई है। यह समिति सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, गरीब मरीजों को बेहतर इलाज और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार जैसे विषयों पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी।

Community Health Centers: रीवा, देवास और गुना में आउटसोर्स मॉडल का पायलट प्रोजेक्ट

कैबिनेट ने रीवा, देवास और गुना जिलों के चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स प्रणाली के माध्यम से संचालित करने की पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। इन केंद्रों में डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालन का प्रयोग किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया एमपीपीएचएससीएल के माध्यम से पूरी की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों को छोटी बीमारियों के लिए जिला अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। पांच वर्षों तक योजना की समीक्षा की जाएगी और सफल होने पर इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

Tribal Education Scheme: जनजातीय विद्यार्थियों के लिए 687 करोड़ रुपये स्वीकृत

कैबिनेट ने जनजातीय कार्य विभाग की अनुदान आधारित शैक्षणिक एवं कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के लिए 687 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यह राशि 22 जिलों में संचालित 32 अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं के विद्यालयों, छात्रावासों, आश्रम शालाओं, बालवाड़ियों और आरोग्य केंद्रों के संचालन एवं कर्मचारियों के वेतन पर खर्च की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधा और समान अवसर उपलब्ध कराना है।

Sericulture Development: रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ रुपये की मंजूरी

मध्यप्रदेश में रेशम उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए रेशम संचालनालय की आठ प्रमुख योजनाओं की निरंतरता हेतु 639.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि का उपयोग रेशम समृद्धि योजना, टसर रेशम विकास, उद्योग विस्तार, ब्रांडिंग एवं विपणन, क्लस्टर विकास कार्यक्रम, सिंचाई सुविधाओं और अन्य अधोसंरचना निर्माण कार्यों में किया जाएगा। इन योजनाओं का उद्देश्य रेशम उत्पादकों, धागाकरण हितग्राहियों, बुनकरों और उद्यमियों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजन करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित करना है।