मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के साथ शिक्षक कल्याण पर भी फोकस है। 5 दिनों में 851 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी हुए, जबकि छात्रों को लैपटॉप सहायता भी दी गई।

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों के निराकरण पर भी सरकार का फोकस है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग ने दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रित परिवारों से जुड़े अनुकंपा नियुक्ति के पुराने प्रकरणों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की है।

विभाग के मुताबिक, पिछले 4-5 दिनों में कुल 851 अनुकंपा नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं। इनमें दो दिन पहले जारी किए गए 251 नियुक्ति आदेश भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इससे पात्र परिवारों को उनके अधिकार समय पर मिल सकेंगे और लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।

MP Education Department: दिवंगत शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सहारा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा विभाग में काम करने वाले दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रित परिवारों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। इसी दिशा में लंबे समय से लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों के निराकरण में तेजी लाई गई है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य पात्र आश्रितों को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के साथ परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देना है। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया से ऐसे परिवारों को सम्मानजनक जीवन के लिए आधार मिल सकेगा।

इसके साथ ही कर्मचारी कल्याण शिविर भी शुरू किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से शिक्षक और कर्मचारी अपनी समस्याएं ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। इससे शिकायतों और अन्य विभागीय मामलों की निगरानी तथा उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज करने का प्रयास किया जा रहा है।

MP Education Policy: नई शिक्षा नीति के साथ व्यवस्था में बदलाव

राज्य सरकार का जोर शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और रोजगार से जोड़ने पर है। स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों के लिए संसाधन बढ़ाने और तकनीक के इस्तेमाल को विस्तार देने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के तहत मुफ्त किताबें, साइकिल, यूनिफॉर्म, लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वहीं, सांदीपनि स्कूलों के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने पर भी काम किया गया है।

शिक्षा विभाग ने प्रवेश और विभागीय प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के लिए Education Portal 3.0 और Student Directory Management System जैसी व्यवस्थाएं विकसित की हैं। इससे विद्यार्थियों और विभागीय प्रक्रियाओं को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

MP Laptop Scheme: 1.21 लाख से ज्यादा छात्रों को 300 करोड़ से अधिक की राशि

मध्य प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने के लिए लैपटॉप सहायता भी दे रही है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत 12वीं बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाती है।

इसी महीने 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर की गई। सरकार के अनुसार, इस आर्थिक सहायता से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई में डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही विद्यार्थियों को आवश्यक पाठ्य सामग्री और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

PM College of Excellence: 55 जिलों में उच्च शिक्षा के नए विकल्प

उच्च शिक्षा के स्तर पर प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए गए हैं। इन कॉलेजों में पारंपरिक विषयों के साथ रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी महत्व दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र शुरू करने, विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराने और नए पाठ्यक्रमों की जानकारी छात्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने ही जिले में उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और पढ़ाई को रोजगार की जरूरतों से जोड़ना है।

Teachers Role: शिक्षा सुधार में शिक्षकों को बनाया अहम भागीदार

शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ सरकार ने शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर दिया है। इसी साल जनवरी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया था। उस कार्यक्रम में सरकारी स्कूलों के परिणामों और नामांकन में सुधार के पीछे शिक्षकों के योगदान पर चर्चा हुई।

सितंबर में शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के युवा शिक्षकों से सीधे संवाद भी किया। इस दौरान शिक्षा नीति, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों को लेकर शिक्षकों के विचार जाने गए। इससे शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों को केवल पढ़ाने वाले कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि बदलाव की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्सेदार के तौर पर शामिल करने की कोशिश दिखाई देती है।

MP Education: डिग्री के साथ कौशल और रोजगार पर भी फोकस

राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अब केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों को कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। स्कूल स्तर पर डिजिटल संसाधन, लैपटॉप जैसी प्रोत्साहन योजनाएं और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। वहीं उच्च शिक्षा के स्तर पर रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सरकार के प्रयासों में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। एक तरफ जहां डिजिटल शिक्षा और उच्च शिक्षा के नए विकल्पों पर काम हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रित परिवारों के लंबित अनुकंपा नियुक्ति मामलों के निपटारे पर जोर दिया जा रहा है।

पिछले कुछ दिनों में जारी 851 अनुकंपा नियुक्ति आदेश इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। सरकार का फोकस शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी ढांचे, डिजिटल सेवाओं, विद्यार्थी प्रोत्साहन, शिक्षक संवाद और रोजगारपरक उच्च शिक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने पर है।