बैतूल के कुकरू दौरे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 15 करोड़ के टूरिज्म सर्किट, होमस्टे, कॉफी प्रोजेक्ट, सड़क, तालाब, रोजगार और कई विकास कार्यों की बड़ी घोषणाएं कीं।
भोपाल/बैतूल। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए 28 जून का दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू को राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कुकरू को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से लैस करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करेगी, जिससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सके।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटकों को एक ही मार्ग पर कई प्रमुख प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों का अनुभव उपलब्ध कराना है।
कुकरू की वादियों में योग कर मुख्यमंत्री ने दिया स्वस्थ जीवन का संदेश
अपने प्रवास की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू की प्राकृतिक वादियों के बीच योगाभ्यास से की। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। योगाभ्यास के दौरान मुख्यमंत्री ने मयूरासन, शीर्षासन, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वक्रासन, भुजंगासन और शलभासन सहित कई कठिन एवं महत्वपूर्ण योगासन सहजता से किए। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों के साथ सामूहिक रूप से नाड़ी शोधन, तितली तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमित योग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद आवश्यक है।
पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत, पर्यटन विकास का प्रेजेंटेशन भी देखा
योग कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने कुकरू से पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया और छोटे बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई। इसके साथ ही उन्होंने कुकरू क्षेत्र के प्रस्तावित पर्यटन विकास की विस्तृत कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण भी देखा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुकरू को प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक सुविधाओं का बेहतर संगम बनाते हुए विकसित किया जाए, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
ईको टूरिज्म, सनराइज-सनसेट प्वाइंट और एडवेंचर गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू में ईको टूरिज्म को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। यहां मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और सुंदर वादियों का संरक्षण करते हुए पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सनराइज और सनसेट प्वाइंट का व्यवस्थित विकास किया जाएगा। साथ ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसोर्ट, पर्यटक आवास, व्यू प्वाइंट और अन्य आवश्यक पर्यटन अधोसंरचना तैयार की जाएगी।
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल, एडवेंचर स्पोर्ट्स तथा अन्य रोमांचक गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस परियोजना के लिए बजट में और वृद्धि भी की जाएगी।
जनजातीय परिवारों के लिए बनेंगे होमस्टे, एमपी टूरिज्म करेगा ऑनलाइन बुकिंग
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पर्यटन विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कुकरू क्षेत्र के जनजातीय परिवारों को होमस्टे योजना से जोड़ा जाएगा। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के मानकों के अनुरूप किया जाएगा तथा पर्यटकों के लिए बुकिंग की व्यवस्था भी मध्यप्रदेश टूरिज्म के माध्यम से होगी। इससे स्थानीय परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिलेंगे तथा उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
'कुकरू नेचुर' ब्रांड के तहत होंगे स्थानीय उत्पादों का प्रचार-प्रसार
मुख्यमंत्री ने बताया कि कुकरू केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि अपनी उत्कृष्ट कॉफी, कोदो-कुटकी, आंवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली, भिलवा सहित अनेक वन उत्पादों के लिए भी जाना जाता है। इन उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं तथा वन विभाग के सहयोग से "कुकरू नेचुर" नाम से विशेष इकाइयां स्थापित की जाएंगी। साथ ही इन उत्पादों के विपणन के लिए शहरों में विशेष आउटलेट भी खोले जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके।
दुग्ध उत्पादों के लिए खुलेंगे विक्रय केंद्र, युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुकरू क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन की अच्छी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए वन विभाग के सहयोग से रबड़ी, मावा, दही तथा अन्य दुग्ध उत्पादों के विक्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार उपलब्ध कराने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से टूरिस्ट गाइड, ड्राइविंग, होटल मैनेजमेंट और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
इसके साथ ही रोबस्टा और अरेबिका कॉफी की खेती, उत्पादन और प्रोसेसिंग के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से विशेष परियोजना शुरू की जाएगी। कॉफी बोर्ड और वन विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएंगे, जिससे क्षेत्र में कॉफी उत्पादन का विस्तार हो सके।
पशुपालन, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से कुकरू क्षेत्र में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाएंगे और पशु शेड निर्माण की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से बनी पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से तालाब का निर्माण कराया जाएगा। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी। वहीं ग्राम कसई में भी तालाब निर्माण की संभावनाओं का सर्वे कराया जाएगा।
सड़क, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की कई घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक आधारभूत परियोजनाओं की घोषणा की। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग के अंतर्गत एक वेलनेस सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा ग्राम जामुखेड़ा में 70 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण, ग्राम लोकलदरी में 40 लाख रुपये से पुलिया निर्माण, ग्राम कसई से भोडियाकुंड तक 85 लाख रुपये की लागत से सड़क, ग्राम कसई फाटा से भोडियाकुंड तक 65 लाख रुपये तथा जामुखेड़ा से इमलीढाना तक 65 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कराया जाएगा।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि ग्राम खामला में 1.20 करोड़ रुपये की लागत से बालिका छात्रावास बनाया जाएगा। वहीं ग्राम कसई में 25 लाख रुपये की लागत से शासकीय उचित मूल्य दुकान का निर्माण होगा। क्षेत्र के अन्य विकास कार्यों के लिए भी विस्तृत सर्वे कर आवश्यक योजनाएं तैयार की जाएंगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खेत में हल चलाकर किसानों का बढ़ाया उत्साह
कुकरू प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रामीण जीवन और कृषि संस्कृति से अपने जुड़ाव का परिचय दिया। उन्होंने किसान सहादेव गायनी के खेत में पहुंचकर स्वयं हल चलाया और मक्का की बुवाई में भाग लिया। किसान सहादेव गायनी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके पास लगभग पांच एकड़ कृषि भूमि है, जहां खरीफ सीजन की तैयारी के तहत मक्का की बुवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने खेती की प्रक्रिया को करीब से देखा और किसानों से कृषि संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने खरीफ फसलों की बुवाई, उत्पादन और उपज के विपणन से जुड़ी जानकारी भी ली तथा किसानों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि प्रदेश की समृद्धि का आधार कृषि और किसान हैं।
युवा की लाठी कला से प्रभावित हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव
खेत भ्रमण के दौरान ग्राम के 21 वर्षीय युवक हेमंत गायनी ने पारंपरिक लाठी चलाने की कला का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री उसकी प्रतिभा से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने युवक की सराहना करते हुए स्वयं भी लाठी घुमाकर उसका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार वहां उपस्थित ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से किया आत्मीय संवाद
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता गांवों के विकास की मजबूत नींव है। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की सदस्य नीता धाड़से ने बताया कि कृषि सखी के रूप में कार्य करते हुए वे जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि आजीविका मिशन से प्राप्त ऋण सहायता के माध्यम से उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है।
समूह की सदस्य मैना दामजे ने बताया कि पहले वे सीमित स्तर पर मावा और रबड़ी तैयार करती थीं, लेकिन स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनका कारोबार बढ़ा है और आय में भी सुधार आया है। ग्राम खामला की अर्चना विनोद ने बताया कि उनके सीएलएफ को 72 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ है, जिससे समूह की महिलाएं डेयरी, कृषि सखी और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।
प्राकृतिक खेती और कॉफी उत्पादन अपनाने का किया आह्वान
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण शेषराव बरसाकर से प्राकृतिक खेती के अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने तीन वर्षों से प्राकृतिक खेती अपनाने के लाभ साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कुकरू और आसपास का वन क्षेत्र कॉफी उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां आम सहित अन्य फलदार पौधों के साथ कॉफी की खेती कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। साथ ही उन्होंने पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित किए जाने वाले होमस्टे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आएंगे।
आचार्य विद्यासागर योजना की दी जानकारी
मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आचार्य विद्यासागर योजना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने बताया कि पात्र हितग्राहियों को 33 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है तथा बैंक ऋण पर 5 प्रतिशत तक ब्याज प्रतिपूर्ति भी राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इससे ग्रामीणों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक सहायता मिलेगी।
'बैतूल दर्शन' पुस्तिका का हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले के पर्यटन स्थलों पर आधारित 'बैतूल दर्शन' पुस्तिका का विमोचन किया। इस पुस्तिका में जिले के प्रमुख धार्मिक, प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों की विस्तृत जानकारी संकलित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रकाशन पर्यटकों को बैतूल की पर्यटन विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
महिलाओं और नागरिकों को वितरित किए हेलमेट
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्व-सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों को हेलमेट भी वितरित किए। उन्होंने वंदना सावे, सविता आठोले, संतोषी बेलकर, धर्मेंद्र सावे, सायबू आठोले तथा अशोक बेतकर सहित कई हितग्राहियों को हेलमेट प्रदान किए।
वन रक्षक भर्ती में चयनित युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र
मुख्यमंत्री ने वन रक्षक भर्ती परीक्षा में विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग से चयनित 45 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस दौरान राजू बेगा, प्रमोद ठकरिया, अजय सहरिया, रानूबाई बैगा और ज्योति मिल्थरे सहित चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए। उन्होंने युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ प्रदेश के वन और पर्यावरण संरक्षण में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
कुकरू के ऐतिहासिक कॉफी बागान का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू स्थित ऐतिहासिक कॉफी बागान का भी दौरा किया। उन्होंने वहां की भौगोलिक परिस्थितियों, मिट्टी की गुणवत्ता और कॉफी उत्पादन की संभावनाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों और विशेषज्ञों से कहा कि अधिक से अधिक स्थानीय किसानों को कॉफी उत्पादन से जोड़ा जाए, ताकि उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके। मुख्यमंत्री ने कॉफी प्रोसेसिंग का कार्य कर रही कंपनी के प्रतिनिधियों से भी चर्चा कर उत्पादन, प्रोसेसिंग और विपणन को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि कॉफी उद्योग भविष्य में कुकरू क्षेत्र की पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को नई मजबूती देगा।
1944 से जुड़ा है कुकरू के कॉफी बागान का इतिहास
कुकरू का कॉफी बागान ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसकी स्थापना वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हेंड्रिक्स द्वारा की गई थी। लगभग 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह बागान आज भी क्षेत्र की प्रमुख प्राकृतिक और कृषि धरोहर के रूप में जाना जाता है। राज्य सरकार अब इसी विरासत को आधुनिक तकनीक और नई योजनाओं के साथ आगे बढ़ाकर किसानों और पर्यटन दोनों को लाभ पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रमुख घोषणाएं एक नजर में
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें कुकरू में पर्यटन विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की परियोजना, रोबस्टा और अरेबिका कॉफी उत्पादन एवं प्रोसेसिंग के लिए एक करोड़ रुपये की योजना, तालाब निर्माण, वेलनेस सेंटर की स्थापना, सड़क एवं पुलिया निर्माण, बालिका छात्रावास, शासकीय उचित मूल्य दुकान, स्थानीय प्राकृतिक उत्पादों के लिए 'कुकरू नेचुर' ब्रांड की स्थापना, होमस्टे विकास, दुग्ध उत्पाद विक्रय केंद्र, पर्यटन आधारित रोजगार प्रशिक्षण तथा अन्य आधारभूत विकास कार्य शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार का उद्देश्य कुकरू को पर्यटन, कृषि, प्राकृतिक उत्पाद, कॉफी उत्पादन और ग्रामीण रोजगार का एक सशक्त मॉडल बनाना है।


