CM मोहन यादव ने श्रीकृष्ण पर डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने और उज्जैन में रिसर्च लाइब्रेरी बनाने के निर्देश दिए। प्रदेश के 3200 से अधिक मंदिरों के विकास की भी तैयारी है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को नई पहचान देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और शिक्षाओं पर आधारित शोध, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। इसके तहत भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री, नाटक और संगीत श्रृंखलाओं के लिए एक समर्पित यूट्यूब डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं उज्जैन में दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों को सुरक्षित रखने और अध्ययन के लिए अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी भी स्थापित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विचार आज भी जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की थी। इसके अलावा मध्यप्रदेश के कई स्थानों से भी उनका संबंध रहा है। ऐसे सभी स्थान आम लोगों के लिए तीर्थ के समान महत्व रखते हैं। इसलिए प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को धार्मिक और सांस्कृतिक तीर्थ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्य समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने, धार्मिक स्थलों के विकास और मंदिरों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कई निर्देश दिए।
Shri Krishna Digital Platform: भगवान श्रीकृष्ण पर बनेगा अलग YouTube चैनल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके विचारों पर आधारित सामग्री को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया जाए। इसके लिए यूट्यूब पर अलग प्लेटफॉर्म के संचालन की योजना बनाई जा रही है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित शोध वृत्तचित्र, नाट्य प्रस्तुतियां और संगीत श्रृंखलाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनसे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को आधुनिक माध्यमों से लोगों तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन गतिविधियों को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रखा जाए। जनभागीदारी और अलग-अलग शासकीय योजनाओं के समन्वय से इन्हें एक व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाए। इससे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को भी भगवान श्रीकृष्ण के विचारों को समझने का अवसर मिलेगा।
Ujjain Research Library: उज्जैन में बनेगी दुर्लभ पांडुलिपियों की अत्याधुनिक लाइब्रेरी
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े शोध और अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन में अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है। इस लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों, शोध पत्रों और श्रीकृष्ण से संबंधित महत्वपूर्ण साहित्य को संरक्षित किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, विद्यार्थियों और धर्म-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों को अध्ययन के लिए एक बेहतर केंद्र उपलब्ध होगा। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके विचारों पर गंभीर शोध को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण के विचार केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि जीवन प्रबंधन और अर्थव्यवस्था के संचालन जैसे विषयों में भी आज प्रासंगिक हैं। कृषि, गौ-संवर्धन और उनकी दक्षता से जुड़ी विभिन्न कलाओं एवं विद्याओं पर केंद्रित विचार सत्र और संगोष्ठियां आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने इन आयोजनों को प्रदेश स्तर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि भगवान श्रीकृष्ण के विचारों और शिक्षाओं पर व्यापक चर्चा हो सके।
MP Krishna Teerth: श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करेगी सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त की थी। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य स्थान भी उनके जीवन और यात्राओं से जुड़े हुए हैं। इन सभी स्थलों का आम लोगों के लिए विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। यहां श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी संरक्षित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मंदिरों का संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन इस तरह किया जाना चाहिए कि श्रद्धालु उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। मंदिरों में आने वाले लोगों को सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिलें, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं और संगठनों का सहयोग लेकर इन धार्मिक स्थलों के विकास की दिशा में काम करने की बात भी कही।
Krishna Temples Development: मंदिरों की आय से गौशालाओं और वृंदावन गांवों का होगा विकास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंदिरों से जुड़ी जमीनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिरों की व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए इनसे जुड़ी भूमि के उपयोग की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। इसके तहत मंदिरों की जमीन पर कृषि के साथ दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएं। इससे मंदिरों की आय बढ़ाने और उनकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि बड़े मंदिरों की आय का कुछ हिस्सा आसपास की गौशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्थाओं को सुधारने में लगाया जा सकता है। इससे धार्मिक स्थलों के साथ आसपास के क्षेत्रों का भी विकास होगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा में गौ-संवर्धन का विशेष महत्व है। इसलिए मंदिरों की व्यवस्था और गौशालाओं के विकास को आपस में जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
Jal Ganga Abhiyan: मंदिरों के जलकुंडों और जल संरचनाओं का होगा जीर्णोद्धार
मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसरों में मौजूद जल संरचनाओं के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में स्थित जलकुंडों और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार और संवर्धन किया जाना चाहिए। इसके लिए जल गंगा अभियान के अंतर्गत जरूरी गतिविधियां संचालित करने को कहा गया है। इससे धार्मिक स्थलों पर मौजूद पारंपरिक जल स्रोतों को सुरक्षित रखने और उनके बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिरों का विकास केवल भवनों और सुविधाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। वहां मौजूद ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
Shri Krishna Pathey Yojana: सांदीपनि आश्रम सहित कई धार्मिक स्थलों के विकास की समीक्षा
बैठक में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम के विकास और जीर्णोद्धार के लिए भूमि पूजन किया जा चुका है। इसके अलावा प्रदेश के 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
बैठक में अलग-अलग जिलों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी भी ली गई। इनमें महिदपुर का नारायण धाम, छतरपुर का श्रीकृष्ण धाम, इंदौर जिले के महू स्थित जानापाव, धार का अमझेरा, चंदेरी का मां जागेश्वरी लोक, पन्ना का श्रीकृष्ण राधा लोक और रायसेन जिले की जमगढ़ पहाड़ियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के कामकाज की समीक्षा करते हुए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
Shri Krishna Pathey Nyas Meeting: बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्य समिति की बैठक सोमवार को मंत्रालय में आयोजित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी अध्यक्षता की। बैठक में संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, शिवशेखर शुक्ला, अनुपम राजन, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक स्थलों के संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने, शोध और अध्ययन की सुविधाएं विकसित करने तथा श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत चल रहे कार्यों को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, रिसर्च लाइब्रेरी, मंदिरों के विकास और तीर्थ स्थलों के विस्तार के जरिए इन प्रयासों को नई दिशा देने की तैयारी है।






