CM मोहन यादव ने मुंबई में फार्मा कंपनियों से निवेश पर चर्चा की। MP में 54 प्रस्तावों से ₹19,477 करोड़ के निवेश और 18,646 रोजगार अवसरों की संभावना है।
मुंबई। मध्यप्रदेश में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस उद्योगों में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई के होटल सेंट रेजिस में आयोजित फार्मा सेक्टर की राउंड टेबल चर्चा में प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान दवा निर्माण, सक्रिय औषधीय घटकों (API), अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और आधुनिक तकनीक पर आधारित निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में दवा निर्माण से लेकर अनुसंधान, परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन तक पूरी औद्योगिक मूल्य श्रृंखला विकसित करने का लक्ष्य है। राज्य की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक क्लस्टर, कुशल मानव संसाधन और निवेश प्रोत्साहन नीतियां इस दिशा में मददगार हैं। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में नए निवेश आएं, उत्पादन क्षमता बढ़े और रोजगार के अवसर तैयार हों।
MP Pharma Investment: भारत की फार्मा इंडस्ट्री में मध्यप्रदेश की बढ़ती भागीदारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत आज दुनिया में ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। भारतीय दवाओं की पहुंच 200 से अधिक वैश्विक बाजारों तक है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश का फार्मा निर्यात 30.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस विकास यात्रा में मध्यप्रदेश भी अपनी भागीदारी बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में निर्मित फार्मा उत्पाद 160 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023-24 में मध्यप्रदेश से करीब 11,889 करोड़ रुपये के फार्मा उत्पादों का निर्यात दर्ज किया गया था।
राज्य में पहले से मौजूद विनिर्माण इकाइयां और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव नई परियोजनाओं के लिए अवसर पैदा कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इस औद्योगिक आधार को और मजबूत करना है, ताकि प्रदेश दवा निर्माण के साथ अनुसंधान, नई तकनीक और निर्यात के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सके।
MP Pharma Companies: प्रदेश में 300 से ज्यादा फार्मा कंपनियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से अधिक सक्रिय औषधीय घटक (API) एवं बल्क ड्रग निर्माता मौजूद हैं। प्रदेश के कई शहरों में फार्मा उद्योग का आधार विकसित हो चुका है। इनमें इंदौर, पीथमपुर-धार, भोपाल-रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, भिंड और मुरैना प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इंदौर क्लस्टर में 96 से अधिक, पीथमपुर-धार में 57 से अधिक और भोपाल-रायसेन में 36 से अधिक फार्मा इकाइयां हैं।
प्रदेश में उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी शैक्षणिक संस्थानों का नेटवर्क मौजूद है। मध्यप्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज, 200 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 140 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। डॉ. यादव ने कहा कि निवेशकों को यहां केवल जमीन ही नहीं, बल्कि कुशल कर्मचारी, परिवहन संपर्क और बाजारों तक पहुंच जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। इससे दवा निर्माण के साथ अनुसंधान और तकनीक आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
MP Pharma Investment Proposals: 54 प्रस्तावों से ₹19,477 करोड़ के निवेश की संभावना
मुख्यमंत्री ने फार्मा सेक्टर में पिछले 18 महीनों के दौरान मिले निवेश प्रस्तावों का भी विवरण दिया। उनके अनुसार, इस अवधि में कुल 54 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 19,477 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और करीब 18,646 रोजगार अवसरों की संभावना जताई गई है।
इन प्रस्तावों में से 34 इकाइयों के लिए लगभग 12,306 करोड़ रुपये के निवेश पर भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं से करीब 10,298 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है। इसी अवधि में 14 इकाइयों ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है। इंदौर, देवास, उज्जैन, भोपाल, धार, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में नई फार्मा और लाइफ साइंस इकाइयों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। सरकार की कोशिश है कि निवेश प्रस्ताव केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, उत्पादन और रोजगार सृजन तक पहुंचें।
MP Industrial Policy 2025: फार्मा कंपनियों को मिल सकती है 40% तक प्रोत्साहन सहायता
मध्यप्रदेश सरकार की उद्योग संवर्धन नीति-2025 में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को फोकस सेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता (BIPA) देने का प्रावधान है। एपीआई, बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान भी किया गया है। इसके अलावा अनुसंधान, परीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग सहायता योजनाएं निर्धारित की गई हैं।
नीति के तहत प्रमुख प्रोत्साहन इस प्रकार हैं:
- निवेश प्रोत्साहन: पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता।
- API और मेडिकल डिवाइस: पात्र परियोजनाओं के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान।
- कंपनी का अनुसंधान एवं विकास: अपने R&D कार्यों पर किए गए व्यय के लिए 50 प्रतिशत सहायता।
- परीक्षण प्रयोगशालाएं: पात्र परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए एक करोड़ रुपये तक सहायता।
- गुणवत्ता प्रमाणन: गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अलग से एक करोड़ रुपये तक सहायता।
- स्वतंत्र R&D केंद्र: स्थायी पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 25 करोड़ रुपये तक।
- निर्यात सहायता: निर्यातोन्मुख इकाइयों को माल परिवहन लागत की 50 प्रतिशत सहायता, पांच वर्षों तक और अधिकतम दो करोड़ रुपये की सीमा में।
इन प्रावधानों के जरिए राज्य सरकार निवेशकों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।
Green Pharma Manufacturing: पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहन
फार्मा उद्योग में पर्यावरण प्रबंधन और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए भी नीति में सहायता का प्रावधान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पांच करोड़ रुपये तक और शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन (Zero Liquid Discharge) व्यवस्था के लिए 10 करोड़ रुपये तक सहायता दी जा सकती है। निजी भूमि पर अधोसंरचना विकास के लिए पांच करोड़ रुपये तक और तकनीक हस्तांतरण के लिए एक करोड़ रुपये तक सहयोग का प्रावधान है।
सरकार का जोर केवल नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने पर नहीं, बल्कि उत्पादन की ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर भी है, जिसमें पर्यावरणीय मानकों, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक का ध्यान रखा जाए। इन सुविधाओं से कंपनियों को अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और तकनीकी क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
Ujjain Medical Device Park: 57 इकाइयों को आवंटन, 17 में उत्पादन शुरू
उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क को मध्यप्रदेश में चिकित्सा उपकरण निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्क में 57 इकाइयों को भूमि आवंटित की जा चुकी है, जबकि 17 इकाइयों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 2,374.86 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 9,625 रोजगार अवसरों की संभावना है।
मेडिकल डिवाइस पार्क के विकास से प्रदेश में चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं। सरकार इस औद्योगिक क्षेत्र के जरिए मेडिकल डिवाइस कंपनियों को एक ऐसा आधार उपलब्ध कराना चाहती है, जहां वे अपनी इकाइयां स्थापित कर सकें और उत्पादन का विस्तार कर सकें।
Ratlam Mega Industrial Park: 1,666 हेक्टेयर में बनेगा औद्योगिक क्षेत्र
मध्यप्रदेश सरकार रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पार्क में फार्मा, बायोटेक और केमिकल सेक्टर के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार की योजना दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के निर्माण से आगे बढ़कर फार्मा उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला को प्रदेश में विकसित करने की है।
इसमें तैयार दवाओं के साथ टीके, इंजेक्टेबल दवाएं, जैव प्रौद्योगिकी, कोशिका एवं जीन आधारित उपचार, चिकित्सा उपकरण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर तैयार होंगे। साथ ही, वैश्विक बाजारों के लिए प्रदेश में ही उत्पादन और तकनीकी विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
Pharma Round Table Mumbai: प्रमुख कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेश में दिखाई रुचि
मुंबई में हुई राउंड टेबल चर्चा में दवा निर्माण, API, ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं, विशेष औषधियों तथा अनुसंधान के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई।
बैठक में शामिल निवेशकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से कहा कि उनमें से कई और उनके उद्योग समुदाय के अन्य सदस्य मध्यप्रदेश में निवेश करने के इच्छुक हैं। उन्होंने प्रदेश में उपलब्ध नीतिगत प्रोत्साहनों और सुविधाओं को निवेश के लिए उपयोगी बताया तथा जल्द मध्यप्रदेश आने की इच्छा जताई।
इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA) के महासचिव डॉ. टोनी परमार ने भी कहा कि बैठक में कई वरिष्ठ उद्योग प्रतिनिधि मौजूद हैं और उनमें से अनेक मध्यप्रदेश में निवेश करना चाहते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उद्योग जगत जल्द प्रदेश का दौरा करेगा और मध्यप्रदेश के साथ मिलकर देश के विकास के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा।
Pharma Companies in MP: जानिए किन कंपनियों की क्या है विशेषज्ञता
राउंड टेबल में शामिल और आमंत्रित कंपनियां दवा निर्माण से लेकर विशेष औषधियों, API और अनुसंधान तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं। इनमें कई ऐसी कंपनियां हैं जिनकी भारतीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मौजूदगी है।
एनक्यूब एथिकल्स और आईपीसीए
एनक्यूब एथिकल्स के प्रबंध निदेशक मेहुल शाह की कंपनी क्रीम, ऑइंटमेंट, जेल और लोशन जैसी त्वचा पर इस्तेमाल होने वाली औषधियों के विकास और विनिर्माण में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए उत्पाद विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण भी करती है। वहीं, आईपीसीए के प्रबंध निदेशक अजीत कुमार जैन की कंपनी API और तैयार दवाओं के निर्माण में सक्रिय है। इसके उत्पाद दर्द प्रबंधन, हृदय रोग, मलेरिया और संक्रमणरोधी उपचार जैसे कई चिकित्सीय क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं।
अजंता फार्मा और ल्यूपिन
अजंता फार्मा के अध्यक्ष सतीश अग्रवाल की कंपनी ब्रांडेड जेनेरिक और जेनेरिक दवाओं का विकास, निर्माण और विपणन करती है। नेत्र रोग, त्वचा रोग, हृदय रोग और दर्द प्रबंधन इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। ल्यूपिन के निदेशक के. आर. गुप्ता की कंपनी जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के अलावा जटिल जेनेरिक उत्पादों, बायोसिमिलर और API के क्षेत्र में भी काम करती है। दोनों कंपनियों की गतिविधियां भारतीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैली हुई हैं।
मैक्लियोड्स फार्मास्युटिकल्स, अमोली और गुफिक बायोसाइंसेज
मैक्लियोड्स फार्मास्युटिकल्स संक्रमणरोधी दवाओं के साथ टीबी, एचआईवी, हृदय रोग और मधुमेह जैसे उपचार क्षेत्रों में सक्रिय है। अमोली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपेश कामदार की कंपनी API और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मध्यवर्ती रसायनों के उत्पादन से जुड़ी है।
गुफिक बायोसाइंसेज विशेष औषधीय उत्पादों के क्षेत्र में काम करती है। इसकी विशेषज्ञता इंजेक्टेबल दवाओं और लाइयोफिलाइज्ड दवाओं में है। लाइयोफिलाइजेशन एक विशेष प्रक्रिया है, जिसमें दवा को फ्रीज करके उसका पानी हटाया जाता है, ताकि उत्पाद की स्थिरता और भंडारण क्षमता बेहतर हो सके।
एस. कांत हेल्थकेयर और ब्लू क्रॉस लेबोरेटरीज
एस. कांत हेल्थकेयर स्वास्थ्य उत्पादों और फार्मास्युटिकल फॉर्मुलेशन के विनिर्माण एवं विपणन से जुड़ा समूह है। ब्लू क्रॉस लेबोरेटरीज विभिन्न चिकित्सीय क्षेत्रों में ब्रांडेड दवाओं के विकास, निर्माण और विपणन का काम करती है। इसके अलावा डाइमैक इंडस्ट्रीज़ और एमिल फार्मा के प्रतिनिधियों को भी इस संवाद के लिए आमंत्रित किया गया था।
सिप्ला, ग्लेनमार्क और एल्केम की विशेषज्ञता
राउंड टेबल के लिए सिप्ला, ग्लेनमार्क और एल्केम के वरिष्ठ प्रबंधन का प्रतिनिधित्व भी प्रस्तावित था। सिप्ला श्वसन रोगों, दीर्घकालिक उपचार और संक्रमणरोधी दवाओं के अपने व्यापक पोर्टफोलियो के लिए जानी जाती है। ग्लेनमार्क एक अनुसंधान आधारित कंपनी है, जिसके प्रमुख क्षेत्र श्वसन रोग, त्वचा रोग और कैंसर उपचार हैं। एल्केम संक्रमणरोधी दवाओं, पाचन तंत्र संबंधी उपचार, दर्द प्रबंधन, विटामिन और दीर्घकालिक उपचार के क्षेत्रों में सक्रिय है।
IDMA की भूमिका: दवा उद्योग और सरकार के बीच संवाद
इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA) के महासचिव डॉ. टोनी परमार को भी राउंड टेबल चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था। IDMA भारतीय दवा निर्माताओं का उद्योग संघ है। यह दवा उद्योग से जुड़े नीतिगत मामलों, गुणवत्ता मानकों, विनिर्माण, मूल्य निर्धारण और औद्योगिक विकास जैसे विषयों पर सरकार तथा नियामक संस्थाओं के साथ संवाद करता है।
मध्यप्रदेश सरकार और फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों के बीच इस चर्चा का उद्देश्य उद्योग की जरूरतों को समझना और निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाना रहा। राज्य में पहले से मौजूद फार्मा क्लस्टर, मेडिकल डिवाइस पार्क, निवेश प्रोत्साहन और कुशल मानव संसाधन को नए निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश किया गया।
सरकार की योजना फार्मा, बायोटेक और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ उत्पादन, अनुसंधान, निर्यात और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने की है।


