मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता बताया। भारत में अब चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है।

भोपाल/श्योपुर। मध्यप्रदेश में वाइल्डलाइफ संरक्षण के लिए 11 मई का दिन बेहद खास रहा। श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में दो और मादा चीतों को बाड़े से मुक्त कर खुले जंगल में छोड़ दिया गया। बाड़े से बाहर आते ही दोनों चीते जंगल की ओर दौड़ पड़े। अब ये चीते केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों के इको-सिस्टम को भी मजबूत करने में मदद करेंगे।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क पहुंचे और उन्होंने खुद इन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया है।

Project Cheetah को मिली नई रफ्तार, बढ़ी चीतों की संख्या

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब साढ़े तीन साल पहले कूनो में ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की थी। अब यह परियोजना लगातार सफलता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन में मध्यप्रदेश लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। आज प्रदेश को देशभर में ‘चीता स्टेट’ के रूप में पहचान मिल चुकी है। फिलहाल भारत में चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है। इनमें से 54 चीते कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभ्यारण्य में मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले- मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास

कूनो दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वाइल्डलाइफ संरक्षण में नया इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से लाए गए दो मादा चीतों को आज खुले वातावरण में छोड़ा गया है। यह सह-अस्तित्व और प्रकृति संरक्षण की भावना का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने श्योपुर और चंबल क्षेत्र के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अब चीतों का बसेरा लगभग 5 हजार वर्ग किलोमीटर तक फैल चुका है। कई बार चीते दौड़ते-दौड़ते राजस्थान तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि चीते चंबल, ग्वालियर, शिवपुरी और राजगढ़ जैसे इलाकों में भी दिखाई दे रहे हैं। यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, वन विभाग के अधिकारियों, मेडिकल स्टाफ और स्थानीय लोगों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी ने मिलकर प्रोजेक्ट चीता को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बोत्सवाना से आए 9 नए चीते, 2 को जंगल में छोड़ा गया

गौरतलब है कि इसी साल फरवरी के अंत में बोत्सवाना से 9 नए चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनमें 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। भारत लाने के बाद सभी चीतों को पहले क्वारंटीन में रखा गया। इसके बाद उन्हें छोटे बाड़ों में शिफ्ट किया गया ताकि वे यहां के वातावरण और मौसम के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

इन्हीं 9 चीतों में से दो मादा चीतों को अब खुले जंगल में छोड़ा गया है। माना जा रहा है कि इससे ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति मिलेगी और भारत की वाइल्डलाइफ हिस्ट्री में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाएगा।

Genetic Diversity बढ़ाने में मदद करेंगे बोत्सवाना के चीते

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीते ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं। इससे कूनो में चीतों की स्वस्थ और लंबे समय तक टिकने वाली आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि ये चीते जल्द ही कूनो के वातावरण में पूरी तरह घुल-मिल जाएंगे। भविष्य में इन्हें गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभ्यारण्यों में भी बसाने की तैयारी की जा रही है।

कब और कहां से भारत लाए गए चीते?

भारत में चीतों की वापसी की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से 8 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इसके बाद साल 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत पहुंचे। अब बोत्सवाना से भी नए चीते लाए गए हैं। इन्हें भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से ग्वालियर लाया गया था। वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया।

‘प्रोजेक्ट चीता’ का मुख्य उद्देश्य भारत से लुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को फिर से बसाना, उनकी संख्या बढ़ाना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार एवं विचरण के लिए तैयार करना है।