MP News: क्या सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन पूरी तरह तैयार हो रहा है? क्या 40 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं बनेंगी? क्या 25 हजार करोड़ के विकास कार्य समय पर पूरे होंगे? क्या शिप्रा नदी को प्रदूषणमुक्त बनाया जा सकेगा? क्या ग्रीन सिंहस्थ और जीरो वेस्ट मॉडल नई मिसाल बनेगा? जानिए समीक्षा बैठक के बड़े फैसले।
उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, स्वच्छ भारत मिशन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। प्रशासनिक संकुल स्थित कलेक्टर कार्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा की गई।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि सिंहस्थ-2028 देश और दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक होगा। ऐसे में स्वच्छता, पेयजल, परिवहन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भोजन जैसी सभी मूलभूत व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ समय पर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियां अंतरराष्ट्रीय स्तर की हों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
Simhastha 2028 Preparation: स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर
स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा के दौरान ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, उपयोग किए जा चुके जल के पुनः उपयोग तथा शौचालय निर्माण से जुड़े कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने सभी 16 स्मार्ट शहरों में स्वच्छता जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) मॉडल को मजबूत बनाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही व्यक्तिगत और सामुदायिक शौचालयों की वास्तविक आवश्यकता का सर्वे कर मांग के अनुरूप प्रस्ताव भेजे जाएं। सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव और नियमित सफाई पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया।
IIM Indore MoU: आईआईएम इंदौर, आईआईएम नागपुर और नगरीय विकास विभाग के बीच समझौता
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री खट्टर की मौजूदगी में आईआईएम इंदौर, शहरी विकास विभाग और आईआईएम नागपुर के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य नगरीय विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर शोध, प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देना है।
CM Mohan Yadav Statement: केंद्र और राज्य मिलकर कर रहे विकास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सरकार भी सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार कोई केंद्रीय मंत्री उज्जैन आकर इतने व्यापक स्तर पर प्रदेश के विकास कार्यों की समीक्षा कर रहा है। इससे प्रदेश को बेहतर मार्गदर्शन मिल रहा है और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
Shipra River Project: श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए चल रही परियोजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कान्ह क्लोज डक्ट डायवर्जन परियोजना और सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। बताया गया कि शिप्रा नदी को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए 919 करोड़ रुपये की लागत से कान्ह क्लोज डक्ट डायवर्जन परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके माध्यम से दूषित जल को नदी में जाने से रोका जाएगा।
Ujjain Development Projects: 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य
बैठक में जानकारी दी गई कि सिंहस्थ-2028 के दौरान करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए उज्जैन सहित आसपास के जिलों में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, पुल, नए घाट, शहर के बुनियादी ढांचे का विस्तार और यातायात सुविधाओं का विकास शामिल है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
Ujjain Connectivity Project: उज्जैन की कनेक्टिविटी होगी और मजबूत
उज्जैन को देश के अन्य हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ने के लिए कई बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। इनमें 1,692 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-इंदौर छह लेन मार्ग, 2,935 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, 5,017 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-जावरा चार लेन मार्ग, 2,523 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-झालावाड़ चार लेन मार्ग और 351 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन-मक्सी चार लेन मार्ग का निर्माण शामिल है। इसके अलावा शहर की आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और उन्नयन का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
New Bridges and Parking: 22 नए पुल और 30 पार्किंग सेंटर बनेंगे
सिंहस्थ की तैयारियों के तहत 22 से अधिक नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 5 रेलवे ओवरब्रिज और 17 नदी पुल भी बनाए जा रहे हैं। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक आधुनिक डिजिटल कमांड प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। करीब 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 30 पार्किंग सेंटर बनाए जाएंगे। आसपास के जिलों में भी पार्किंग और होल्डिंग एरिया की व्यवस्था की जाएगी।
Drinking Water Scheme: 1133 करोड़ की जल आवर्धन योजना
उज्जैन शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 1,133 करोड़ रुपये की लागत से जल आवर्धन योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत 200 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। साथ ही 700 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन नेटवर्क, 17 नए ओवरहेड टैंक और लगभग 49 हजार नए पेयजल कनेक्शन दिए जाएंगे।
Green Simhastha 2028: जीरो वेस्ट और हरित सिंहस्थ की तैयारी
राज्य सरकार सिंहस्थ-2028 को जीरो वेस्ट और पर्यावरण अनुकूल आयोजन बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए 20 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 3.2 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। इसके अलावा उज्जैन में 550 बेड वाले आधुनिक मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़ी सुविधाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। वहीं 46 करोड़ रुपये की लागत से आईटी पार्क का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
MP Energy Review: ऊर्जा क्षेत्र में सुधार और सौर ऊर्जा को बढ़ावा
बैठक में ऊर्जा विभाग और रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। वर्ष 2020-21 में जहां एटीएंडसी हानि 41.55 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर 25.68 प्रतिशत रह गई है।
केंद्रीय मंत्री खट्टर ने पीएम सूर्य घर योजना के तहत अधिक से अधिक कनेक्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुसुम योजना के माध्यम से किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने के प्रयास किए जाएं ताकि किसान अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जा दाता भी बन सकें। उन्होंने सौर ऊर्जा के साथ पवन ऊर्जा परियोजनाओं को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान लगभग 230 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी, इसलिए नई विद्युत अधोसंरचना का विकास तेजी से किया जा रहा है।


