ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में 27 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास करेंगे। मंदिर में भगवान शिव के साथ विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति के उप-देवालय होंगे। जानिए इसकी खासियत और भव्य वास्तुकला।
नर्मदा किनारे बसे ओंकारेश्वर में एक और भव्य धार्मिक-सांस्कृतिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। 27 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘एकात्म धाम’ में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास करेंगे। सुबह 6 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में संतों और आचार्यों की मौजूदगी में वैदिक अनुष्ठान के साथ मंदिर निर्माण की शुरुआत होगी।
45 पवित्र शिलाओं का होगा पूजन
शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव, संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि, षड्दर्शन संत मंडल के संत और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। इस दौरान 45 पवित्र शिलाओं का पूजन किया जाएगा। आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् धर्मगिरि और दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् कर्नाटक सहित विभिन्न गुरुकुलों के आचार्य वैदिक विधि से शिला पूजन संपन्न कराएंगे।
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मंदिर के केंद्र में होंगे भगवान शिव
पंचायतन मंदिर का निर्माण प्राचीन पंचायतन शैली के आधार पर किया जा रहा है। मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा, जबकि चारों दिशाओं के कोनों में भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय बनाए जाएंगे। इस परंपरा का संबंध आदि शंकराचार्य द्वारा विभिन्न उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने से जोड़ा जाता है। पंचायतन दर्शन में शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश को एक ही परम सत्ता के अलग-अलग स्वरूपों के रूप में देखा जाता है।
121 कलश और 80 हजार घन फीट गुलाबी पत्थर
मंदिर की वास्तुकला भी इसे खास बनाएगी। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा, जबकि पूरा मंदिर 16 फीट ऊंचे जगती आधार पर खड़ा किया जाएगा। परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ, 8 लघु संवर्णा और भव्य तोरण-द्वार बनाए जाएंगे। मंदिर को 121 कलशों से सजाया जाएगा और निर्माण में करीब 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर इस्तेमाल किया जा रहा है। पारंपरिक नागर शैली में तैयार हो रहा यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ भारतीय स्थापत्य और मूर्तिकला की परंपरा को भी सामने लाने का प्रयास है।
क्यों खास है पंचायतन पूजा?
पंचायतन उपासना का मूल विचार विविध देव स्वरूपों में एक ही परम ब्रह्म की उपासना करना है। आदि शंकराचार्य से जुड़ी इस परंपरा ने शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य उपासना धाराओं के बीच समन्वय का संदेश दिया। इसी दर्शन को ‘एकात्म धाम’ में स्थापत्य के रूप में साकार करने की तैयारी है। ओंकारेश्वर में बनने वाला पंचायतन मंदिर आने वाले समय में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय ज्ञान, संस्कृति और प्राचीन वास्तुकला के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना सकता है।
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