PM मोदी ने 'मन की बात' में 'कैच द रेन' अभियान पर जोर दिया। उन्होंने मप्र में जल संरक्षण की सराहना करते हुए देशवासियों से बारिश का पानी बचाने और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की अपील की।
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में इस बार जल संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे 'कैच द रेन' अभियान पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के सीधी और नरसिंहपुर जिलों में जल संरक्षण के क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय कार्यों की सराहना करते हुए इन्हें देश के लिए प्रेरणादायक बताया।
रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवाड़ी जिले की धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ओरछा के कंचना घाट पर आम नागरिकों के साथ बैठकर प्रधानमंत्री का 'मन की बात' कार्यक्रम सुना।
तालाब, कुएं, बावड़ियों का निर्माण किया गया
- कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सीधी जिले में करीब 1500 तालाबों का निर्माण किया गया है, जबकि नरसिंहपुर में अमृत सरोवरों का प्रभावी ढंग से विकास और पुनर्जीवन किया गया है। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी की हर बूंद को सहेजना समय की जरूरत है और इसे जनभागीदारी के माध्यम से जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा।
- प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आसपास मौजूद तालाब, कुएं, बावड़ियों और अन्य जल स्रोतों की जिम्मेदारी लें तथा जल संरक्षण के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज बचाया गया पानी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी बनेगा।
'जहां बारिश गिरे, वहीं पानी रोकें'
- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'कैच द रेन' अभियान का मूल मंत्र है—"जहां बारिश गिरे, वहीं पानी सहेजिए।" इसी उद्देश्य से 4 जुलाई से देशभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण जैसे कार्यों को गति दी जा रही है।
- उन्होंने कहा कि गांवों से लेकर शहरों तक, पंचायतों और सामाजिक संगठनों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई है। कई स्थानों पर पुराने तालाबों की सफाई कर गाद निकाली जा रही है, कुओं और बावड़ियों को दोबारा जीवंत किया जा रहा है, जबकि बंद पड़े बोरवेलों को भूजल रिचार्ज के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों और उनके सकारात्मक परिणामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक पानी बचाने का संकल्प ले, तो देश जल संकट से प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है।


