अलवर की सॉफ्टवेयर इंजीनियर आर्शी को आतंकी बताकर ठगों ने फंसाया। घर बैठे ही 'डिजिटल गिरफ़्तारी' का डर दिखाकर खाते से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश की गई।

जयपुर. डिजिटल अरेस्ट... साइबर अपराध के इस नए- तरीके नेता से लेकर पुलिस तक चिंचित है। आए दिन इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं, जब पढ़े-लिखे लोगों को टारगेट कर, उनको डर दिखाकर उनका पैसा लूटा जा रहा है।। राजस्थान में रहने वाली एक महिला प्रोफेसर ने तो सात करोड़ तक लुटा दिए थे। लेकिन अब जो मामला डिजिटल अरेस्ट का सामने आया है वह चौंकाने वाला है।

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अलवर की आर्शी गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर

दरअसल, अलवर की रहने वाली इंजीनियर आर्शी अपने घर पर थी। वह गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। आर्शी के पास फोन आया और फोन करने वाले ने खुद को एसबीआई बैंक अधिकारी बताया और कहा कि तुम आतंकियों से मिली हुई हो, तुम्हारे बारे में जानकारी सामने आई है। ईडी की टीम और पुलिस अधिकारियों की टीम वहां पहुंचने वाली है। इस दौरान बैंक की जानकारी और अन्य जानकारी भी आरबीआई के अधिकारी बने शख्स ने ले ली।

ठगों ने उसे लैपटॉप के सामने से उठने से भी मना कर दिया

बाद में आर्शी को लगने लगा कि उसके साथ साइबर फ्रॉड हो रहा है। ठगों ने उसे लैपटॉप के सामने से उठने से भी मना कर दिया। वह दोपहर एक बजे से रात आठ बजे तक वहीं बैठी रही। इस बीच उसने अपने पति फलित गुप्ता को मैसेज कर दिया। फलित ने पुलिस को सूचना दी और खुद भी घर पहुंचे। ऐन मौके पर पहुंचकर तुरंत लैपटॉप बंद किया। पता चला कि आर्शी इतना डर चुकी थी कि पैसा ट्रांसफर करने ही वाली थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट या साइबर ठगी जैसे मामलों में शायद ही कोई बच पाता है। गनीमत रही कि आर्शी का पैसा बच गया। पुलिस ने केस की जांच शुरू कर दी है।

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