सार

success story : उषा चौमर ने खुद मैला ढोने का काम किया, फिर सुलभ संस्था से जुड़कर सिलाई सीखी। अब 'नई दिशा संस्थान' से 115 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।

अलवर, राजस्थान के अलवर (Alwar News) की रहने वाली उषा चौमर किसी परिचय की मोहताज नहीं है। जो साल 2021 में पद्मश्री भी प्राप्त कर चुकी है। वर्तमान में यह अलवर में नई दिशा संस्थान के माध्यम से 115 महिलाओं को रोजगार से जोड़ रही है। राजस्थान में महिला सशक्तिकरण (women empowerment in rajasthan) के लिए आयोजित होने वाले कई कार्यक्रमों में उषा को मुख्य अतिथि के रूप में इनवाइट भी किया जाता है।

  • लेकिन क्या आप जानते हैं उषा की जिंदगी जैसी आज हम देख रहे हैं वैसी बिल्कुल भी नहीं थी। क्योंकि परिवार की कई पीढ़ियों ने मैला ढोने का काम किया हुआ था। उषा खुद 7 साल की उम्र से यही काम करती थी। शादी होने के बाद जब ससुराल आई तो वहां भी यह काम किया।

जब 2003 में उषा की जिंदगी में बदलाव आया

  • यह काम करने के चलते कोई उनसे बात करना तो दूर अपने पास बैठाना भी पसंद नहीं करता। बस उषा का एक ही काम था कि रास्ते में और किसी के घर से कोई भी समान मिले तो उसे अपनी झोली में डाल को। उसके बाद साल 2003 में उषा की जिंदगी में बदलाव आ गया।
  • जब वह सुलभ संस्था से जुड़ी। यह संस्था लोगों को साफ सफाई के बारे में बताती है। उषा ने बताया इस संस्था से जुड़ने के बाद वह दिल्ली गई। जहां उन्होंने देखा कि वहां ऐसी कई महिलाएं थी। जो पहले मैला ढोने का काम करती थी लेकिन फिर उन्होंने सिलाई और मसाले बनाने जैसे काम शुरू किए।
  • इसके बाद उषा ने भी वह काम छोड़ दिया और फिर खुद ने सिलाई सहित अन्य काम शुरू किए। धीरे-धीरे उषा के अलावा अन्य भी महिलाएं जुड़ने लगी। जो आज मिक्स अचार,जूट के बैग,बत्तियां, हवा करने का पंखा और अन्य सामान बनाती है, जिनकी मार्केट में भी काफी डिमांड है।

कई देशों की यात्रा कर चुकी है उषा

उषा बताती है कि अब तक वह कई देशों की यात्रा कर चुकी है। इस दौरान विदेशों में जाकर उन्होंने जाना कि इस तरह से साफ सफाई रखी जाती है। 2021 में उषा को राष्ट्रपति पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित भी कर चुके हैं। बरहाल राजस्थान में उषा और उनका संस्थान मिसाल कायम कर चुका है।