Bhilwara Shocking News : राजस्थान के भीलवाड़ा से एक शाकिंग मामल सामने आया है। जहां कोर्ट की कर्मचारी महिला के घर से 88 कुत्ते और कंकाल मिले हैं। जांच में सामने आया है कि 15 सालों से महिला 100 से ज़्यादा कुत्तों के साथ रह रही थी। 

Bhilwara Shocking News : राजस्थान के भीलवाड़ा शहर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और आमजन दोनों को हैरत में डाल दिया है। शहर के आज़ाद नगर क्षेत्र में एक सरकारी महिला कर्मचारी अपने घर में 15 वर्षों से 100 से ज्यादा आवारा कुत्तों के साथ रह रही थी। मामला तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने लगातार शिकायतें कीं कि महिला के घर से दुर्गंध आती है और कुत्तों के हमलों से मोहल्लेवासियों का जीना मुश्किल हो गया है।

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भीलवाड़ा कोर्ट में कर्मचारी है महिला

जांच में सामने आया कि महिला, जो पेशे से न्यायालय में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) है, ऑफिस से लौटकर सीधे उन कुत्तों के बीच रहती थी जिन्हें उसने अपने घर में पनाह दे रखी थी। सोमवार को नगर निगम और प्रतापनगर थाना पुलिस की टीम जब मौके पर पहुंची, तो स्थिति बेहद भयावह थी।

महिला के बेडरूम में पड़े थे कुत्तों के कंकाल

घर के अंदर से 88 जीवित कुत्ते रेस्क्यू किए गए, जबकि तीन कुत्तों के शव वहीं पड़े मिले। हैरानी की बात यह रही कि महिला के बेडरूम में कुत्तों के कंकाल, जली हुई इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और बदबूदार वातावरण ने प्रशासनिक टीम को भी स्तब्ध कर दिया। रसोई और शयनकक्ष में अस्त-व्यस्त सामान और बदहाल सफाई व्यवस्था से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वहां किस हाल में रहना पड़ता होगा।

खौफ में बच्चे और बुजुर्ग नहीं निकल पाते थे घर से बाहर

स्थानीय निवासी लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे थे। बच्चे घरों से बाहर नहीं निकल पाते थे और बुज़ुर्गों तक का निकलना मुश्किल हो गया था। शिकायत मिलने पर वार्ड 15 की बीजेपी पार्षद नैना किशन व्यास और युवा नेता शिवराज गुर्जर के नेतृत्व में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

पशु क्रूरता से भी आगे निकला ये मामला

प्रशासन ने महिला अंतिमा जोशी को शांतिभंग की आशंका के तहत हिरासत में लिया और पशु चिकित्सकों की देखरेख में सभी कुत्तों को विभिन्न शेल्टर होम में भेज दिया गया। यह मामला न केवल पशु क्रूरता की गंभीर मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पशु प्रेम के नाम पर यदि संवेदनशीलता की जगह लापरवाही आ जाए, तो स्थिति सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।