राजस्थान में पिछली सरकार ने 17 नए जिलों की घोषणा की थी। लेकिन वर्तमान सरकार ने वहां के अधिकार पुराने कलेक्टर को सौंप दिए हैं। ऐसे में जनता असमंजस में है कि नए जिले रहेंगे या नहीं।

जयपुर. राजस्थान की भजनलाल सरकार ने हाल ही एक आदेश जारी कर नए 17 जिलों की जिम्मेदारी पुराने कलेक्टरों को सौंप दी है। राजस्व से संबंधित सभी अधिकार उन्हीं के पास रहेंगे। जो पहले से देखते आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को लग रहा है कि नए जिले घोषित होने के बाद भी उन जिलों का कोई वर्चस्व नहीं रहेगा।

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राजस्व संबंधी काम पुराने कलेक्टर करेंगे

आपको बता दे कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा अंतिम बजट के रिप्लाई में प्रदेश में 17 नए जिले बनाने की घोषणा की गई थी। जिले बन भी गए लेकिन अब प्रदेश की भजनलाल सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि इन 17 जिलों के राजस्व संबंधी तमाम काम पुराने कलेक्टर के पास ही सुरक्षित कर दिए हैं।

31 मार्च 2025 तक पुराने कलेक्टर का पावर दिया

इसके पहले सरकार इन नए जिलों के रिव्यू को लेकर एक कमेटी का गठन भी कर चुकी है। जिसके बाद सरकार द्वारा राजस्व संबंधी कामों को लेकर जारी किया गया यह आदेश चर्चा में है। आदेश जारी होने के बाद अब होगा यह कि नए जिलों में सोसाइटियों से संबंधित रिवेन्यू कलेक्शन, वर्क सैंक्शन और कामों के बदले भुगतान का काम पुराने कलेक्टर करेंगे। यह पावर पुराने कलेक्टर के पास 31 मार्च 2025 तक रहेगा।

इन जिलों के अधिकार पुराने कलेक्टर के पास

ऐसे में अब अनूपगढ़ का काम बीकानेर और श्रीगंगानगर, गंगापुर सिटी का काम सवाईमाधोपुर, कोटपूतली-बहरोड का काम जयपुर और अलवर, बालोतरा का काम बाड़मेर, जयपुर ग्रामीण का जयपुर, खैरथल का अलवर, ब्यावर का अजमेर, नीमकाथाना का सीकर और झुंझुनू, डीग का भरतपुर, जोधपुर ग्रामीण का जोधपुर, फलोदी का जोधपुर, डीडवाना का नागौर, सलूंबर का उदयपुर, दूदू का जयपुर, केकड़ी का अजमेर और टोंक, सांचौर का जालौर, शाहपुरा का राजस्व संबंधी काम भीलवाड़ा की कलेक्टर देखेंगे।

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संभाग को लेकर सरकार का कोई निर्णय नहीं

सरकार ने अपने इस आदेश में कहीं पर भी संभाग का जिक्र नहीं किया है। ऐसे में एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि सरकार पुरानी सरकार द्वारा बनाए गए संभाग पर कोई फैसला नहीं ले रही है। फिलहाल सरकार के नए जिलों से संबंधी आदेश के बाद कई इलाकों में विरोध भी हो रहा है।

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