dausa car accident news : राजस्थान के दौसा जिले में हुए सड़क हादसे ने हर किसी को हिलाकर रख दिया। कैसे एक झटके में पूरा परिवार ही खत्म हो गया। हरियाणा से मेहंदीपुर बालाजी जॉब मिलने की खुशी में मन्नत पूरी करने निकला था  परिवार…

dausa car accident news : राजस्थान के दौसा जिले में देर रात एक सड़क हादसा हुआ । जिसमें हरियाणा नंबर की गाड़ी पूरी तरह से चकनाचूर हो गई । कर में एक युवक और तीन महिलाओं की लाशें मिली। दोपहर में उनकी पहचान हो सकी। घटना बेहद ही दर्दनाक थी। आरटीओ कर्मचारियों के ऊपर गंभीर आरोप लग रहे हैं।‌ बताया जा रहा है परिवार हरियाणा से मन्नत पूरी करने के लिए मेहंदीपुर बालाजी आ रहा था। परिवार के कुछ अन्य सदस्य दूसरी गाड़ी में थे, जो मेहंदीपुर बालाजी पहुंच चुके थे।

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दौसा हादसे का मंजर देख कांप गया कलेजा

मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हादसा इतना भयानक था कार के परखच्चे उड़ गए। इंजन पूरी तरह चकनाचूर हो गया । कार में फंसे हुए शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। चारों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। कार चला रहे दीपांशु की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। शवों को जैसे-तैसे मुर्दाघर में पहुंचाया गया। उसके बाद उनके बारे में जांच पड़ताल शुरू की गई।

job मिलने की खुशी में मेहंदीपुर बालाजी आया था परिवार

इस परिवार की कहानी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक टूटे हुए सपने की आखिरी सांस है। 20 साल का दीपांशु, जिसने दो दिन पहले ही अपनी मां से कहा था, "इस बार बालाजी जाकर नारियल चढ़ाएंगे," खुद अब दुनिया से विदा हो गया। उसकी मां प्रमिला, बहन साक्षी और दादी राजबाला—all साथ थे, लेकिन अब कोई नहीं बचा। रात 12 बजे के करीब उनकी कार दौसा कलेक्ट्रेट चौराहे के पास हाईवे पर खड़े एक केंटर में जा घुसी। कार के परखच्चे उड़ गए और चारों की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार की दूसरी गाड़ी में साथ आए लोग बालाजी मंदिर पहुंच चुके थे। जब रात को हादसे की खबर मिली, तो वे दौड़े-दौड़े लौटे। अस्पताल की मोर्च्युरी के बाहर दीपांशु के ताऊ भगवान सिंह बैठकर सिर्फ दीवार निहारते रहे—बिलकुल खामोश, जैसे वक्त भी रुक गया हो।

3 महीने में हरियाणा के परिवार के पांच लोग खत्म

पुलिस ने बताया परिवार के सदस्य दो गाड़ियों में थे एक गाड़ी मेहंदीपुर बालाजी पहुंच चुकी थी दूसरी गाड़ी में दीपांशु बैठा था और वही चला रहा था । उसके पिता ड्राइवर थे। 3 महीने पहले उनकी मौत हो गई थी। करीब 2 महीने पहले ही दीपांशु को नई जॉब मिली थी। माना जा रहा है इसी जॉब के लिए परिवार ने मन्नत मांगी थी।

जेब में जो नारियल और झंडा हर कोई रो रहा

'बालाजी के लिए लाया था मन्नत का नारियल नारियल दीपांशु की जेब में जो नारियल और झंडा था, वो देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। यह वही नारियल था जो उसने बालाजी के चरणों में चढ़ाने के लिए लाया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे की वजह बना वह केंटर, जिसे RTO ने चेकिंग के लिए हाईवे पर रोका था।