राजस्थान के ASI सचेंद्र रत्नू भीषण गर्मी में जंगली जानवरों के लिए पानी और भोजन का इंतज़ाम कर रहे हैं। उन्होंने एक ग्रुप बनाकर सूखे तालाबों में पानी भरवाने और फल-सब्जियां रखवाने का काम शुरू किया है, जिसकी सभी तारीफ कर रहे हैं।

जयपुर. राजस्थान में भीषण गर्मी पड़ रही है। हालात यह है कि कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। इसी बीच राजस्थान में राजस्थान पुलिस के ASI सचेंद्र रत्नू का नाम सुर्खियों में है। जो जंगलों में रहने वाले बेजुबान जानवरों के लिए पीने का पानी पहुंचा रहे हैं। इसके लिए इन्होंने एक ग्रुप भी बनाया हुआ है। जिसके चलते अब जंगलों में रहने वाले बेजुबान जानवरों को समय पर पानी मिल पा रहा है। इन्होंने अपना पहल ग्रुप भी बनाया हुआ है जो इसी काम में लगा रहता है।

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बेजुबान जानवरों के लिए कर रहे खाने-पीने का इंतजाम

रत्नू बताते हैं कि पिछले साल जब गर्मी के सीजन में शहर में पानी की कमी थी तब उन्होंने चौराहों पर अस्थाई प्याऊ भी बनवाए थे। वहां कई बेजुबान जानवर पानी पीने के लिए आते थे। इसी को देखकर मन में ख्याल आया कि क्यों न जंगलों में इन बेजुबान जानवरों के लिए पीने का पानी और खाने का इंतजाम किया जाए। इसके बाद सिरोही के वड़ाखेड़ा के जंगलों में सूखे हुए तालाबों में टैंकरों से पानी डलवाने का काम किया जा रहा है जो अभी लगातार जारी है।

राजस्थान के पुलिसवालों की भीषण गर्मी में हो रही तारीफ...

ग्रुप के द्वारा केवल पीने के पानी की व्यवस्था नहीं की जा रही बल्कि जंगल में जगह-जगह फल फ्रूट और कुछ सब्जियां भी रखी हुई है। जिन्हें जंगली जानवर खाकर अपना पेट भर सके और गर्मी से ज्यादा परेशान नहीं हो। ग्रुप के लोग जंगल में बने तालाबों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचा रहे हैं। अब केवल सिरोही ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान के लोग इनके नेक काम की तारीफ कर रहे हैं।

भीषण गर्मी में भी नहीं तोड़ते अपने नियम

ASI रत्नू बताते हैं कि गर्मी के सीजन में उनके ग्रुप का यह काम लगातार जारी रहेगा। तेज गर्मी में वन्यजीवों को पीने के पानी और खाने के लिए भटकना नहीं पड़े इसके लिए लगातार पहल ग्रुप प्रयासरत है। चाहे तेज धूप ही क्यों न हो ग्रुप के लोग लगातार काम में लगे रहते हैं।

इस समाज सेवा के लिए किसी से कोई पैसा नहीं

रत्नू ने बताया कि वह लोग इस समाज सेवा के लिए किसी से कोई पैसा नहीं लेते। बल्कि अपने स्तर पर ही सभी लोग पैसे एकत्रित करते हैं। इसके बाद पीने के पानी के लिए टैंकर और खाने के लिए फल-फ्रूट आदि ले जाते हैं। हालांकि कोई चाहे तो वह खुद की तरफ से मदद कर सकता है।