जयपुर, 30 मार्च (भाषा) जयपुर में 13 मई, 2008 में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा चार आरोपियों को बरी किए जाने से पीड़ित परिवारों को गहरा सदमा लगा है।

जयपुर. जयपुर में 13 मई, 2008 में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा चार आरोपियों को बरी किए जाने से पीड़ित परिवारों को गहरा सदमा लगा है। एक लोअर कोर्ट ने दिसंबर 2019 में मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सलमान, सैफुर, मोहम्मद सरवर आजमी को मौत की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार(29 मार्च) को हाईकोर्ट ने उन्हें इस आधार पर बरी कर दिया कि जांच एजेंसी (ATS) ने सिलसिलेवार सबूतों को जोड़ने में घटिया जांच की। इस मामले ने सरकार की किरकिरी करा दी है।

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 (तस्वीर-ऊपर बरी आरोपी, नीचे पीड़िता रामबाबू, मृतक राधेश्याम यादव की मां, मृतक बच्ची इल्मा की ताई शबनम और अपने पिता खोने वाले गोविंद फूलमाला)

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1. 13 मई 2008 को जयपुर में सिलसिलेवार 8 बम ब्लास्ट हुए थे। इसमें 80 लोगों की मौत हुई थी। 18 दिसंबर 2019 को स्पेशल कोर्ट ने बम ब्लास्ट के 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।

2. PTI की रिपोर्ट के अनुसार, राजेंद्र साहू की पत्नी सुशीला विस्फोट में सिर में चोट लगने के कारण चार साल से कोमा में थीं। 2012 में उनका निधन हो गया। उन्होंने सवाल किया-"अगर इन्होंने विस्फोट नहीं किया, तो बेगुनाहों की हत्या का जिम्मेदार कौन है? अगर चारों दोषी नहीं होते तो दोषी कौन था?"

3. क्लॉथ मर्चेंट राजेंद्र साहू सवाल उठाते हैं-"हमें न्याय दिलाना राज्य की जिम्मेदारी है। इतने सालों में मेरे परिवार के साथ जो हुआ, उसे मैं भूलने की कोशिश कर रहा हूं। यह एक आदर्श बात लगती है, लेकिन क्या यह वास्तव में व्यावहारिक है? मुझे नहीं लगता। जो हुआ उसे भूलना संभव नहीं है।" साहू की पत्नी विस्फोट स्थल चांदपोल के हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ाने गई थी।

4. बम ब्लास्ट जयपुर के माणक चौक खंडा, चांदपोल गेट, बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया गेट, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट पर एक के बाद एक हुए थे। इनमें 185 घायल हुए थे।

5.अतिरिक्त सरकारी वकील(additional government counsel) रेखा मदनानी ने कहा कि राज्य फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा। राज्य सरकार से मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (special leave petition) दायर की जाएगी।

6. इधर, राइट्स एक्टिविस्ट्स ने चारों अभियुक्तों के लिए मुआवजे की मांग की है, जिन्होंने 15 साल जेल में बिताए हैं। कार्यकर्ताओं ने विस्फोटों में मारे गए और घायल हुए लोगों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए मामले की नए सिरे से जांच की भी मांग की है।

7.ब्लास्ट में घायल हुए गजेंद्र सिंह राजावत भी हनुमान मंदिर में प्रार्थना करने गए थे। उन्होंने एक जोरदार धमाका सुना, दर्द महसूस किया और फिर बेहोश हो गए। वह हमले में बाल-बाल बचे। उन्होंने कहा-“मेरे शरीर में 22 छर्रे लगे हैं। उस समय मैंने जो दर्द महसूस किया वह अभियुक्तों के बरी होने के दर्द से बौना हो गया है।"

8. आरोपी के वकील एसएस अली ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले की जांच करने वाले आतंकवाद निरोधी दस्ते( Anti-Terrorist Squad) द्वारा प्रस्तुत पूरे सिद्धांत को गलत पाया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच 4 जांच अधिकारी कर रहे हैं।

9.उधर, दैनिक भास्कर ने भी इस मामले पर एक रिपोर्ट पब्लिश की है, जिसमें पीड़ितों का दर्द बयां किया गया है। वकील रामबाबू कहते हैं कि केस में पुलिस ने लापरवाही बरती, जिसकी वजह से 80 मौतों के जिम्मेदार आरोपी बच गए।

10. कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि गृह विभाग और विधि विभाग को आत्मचिंतन करना होगा। इस बीच सरकार में मंत्री महेश जोशी ने कहा कि सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा, तो जाएगी।

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