Jaipur crime: 1 लाख का iPhone गिरवी, 5000 में खरीदी 'मौत', गंदे नाले के पास इंजेक्शन, और एक साल तक गुमनाम रहा क़ातिल! जयपुर की गलियों में फैले नशे के जाल ने कैसे निगल लिया होनहार प्रियांशु को – जानिए पुलिस की सालभर की जांच का खौफनाक सच…

One Year old case solved Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जहां एक साल पहले हुई युवक की रहस्यमयी मौत की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है। यह मामला जयपुर के शिप्रा पथ थाना क्षेत्र का है, जहां 11 जुलाई 2024 को प्रियांशु मीणा नामक युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। परिवार वालों को शुरुआत से ही शक था कि यह महज ओवरडोज नहीं, साजिशन हत्या थी। अब इस केस में दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी ने इस मौत के पीछे के खौफनाक नशे के सौदागर चेहरे उजागर कर दिए हैं।

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iPhone गिरवी रख नशे की खरीद, फिर ‘एविल’ इंजेक्शन से मौत

पुलिस जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी अभिषेक उर्फ भोला ने अपने दोस्त प्रियांशु को नशे का आदी बना दिया था। घटना वाले दिन भोला ने प्रियांशु का करीब 1 लाख रुपये का iPhone सिर्फ 5000 रुपये में गिरवी रखा। इसी पैसे से उसने खतरनाक इंजेक्शन 'एविल' खरीदा और कल्पना सांसी नामक महिला से स्मैक भी ली। इसके बाद प्रियांशु को एक गंदे नाले के पास बुलाया गया, जहां जबरन उसे इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगते ही प्रियांशु की मौके पर ही मौत हो गई।

कल्पना सांसी – महिला ड्रग सप्लायर जो बना मौत का माध्यम

कल्पना सांसी, जो इस मामले की दूसरी बड़ी आरोपी है, लंबे समय से जयपुर के युवाओं को स्मैक बेच रही थी। वह पहले से ही पुलिस की रडार पर थी। इस केस में उसका नाम तब सामने आया जब अभिषेक ने नशा खरीदने के लिए उसी से संपर्क किया था।

पिता ने कहा था ‘हत्या’ – एक साल बाद साबित हुई बात

प्रियांशु के पिता गजेंद्र मीणा ने तब यह मानने से इनकार कर दिया था कि उनके बेटे की मौत केवल ओवरडोज से हुई। उन्होंने पुलिस को हत्या की आशंका जताई और शिकायत दर्ज कराई। एक साल तक चले इस केस में डीसीपी साउथ दिगंत आनंद और थाना एसएचओ राजेंद्र गोदारा की टीम ने अथक प्रयासों से पूरे मामले का खुलासा किया।

नशे का जाल, युवा पीढ़ी पर हमला

यह घटना सिर्फ एक युवक की मौत नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेलने वाली सोच को उजागर करती है। आज जहां महंगे गैजेट्स युवा वर्ग की प्राथमिकता हैं, वहीं नशे के सौदागर इसे भी साधन बना रहे हैं।