राजस्थान के जैसलमेर की एक बेटी ने जरूरत के समय कलेक्टर को अपनी भरी गुल्लक दे दी थी। उसी बेटी ने नीट एग्जाम में शानदार सफलता हासिल की है।

जैसलमेर. अगर युवा किसी टारगेट को पूरा करने की मन में ठान लें, तो फिर उसे अपनी मंजिल को पाने में देर नहीं लगती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है। राजस्थान की एक मुस्लिम परिवार की लड़की है। जिसका नाम तान्या भाटी है। इन्होंने कोरोना काल में अपनी पैसों से भरी गुल्लक कलेक्टर को पीड़ित मानव की सेवा के लिए दे दी थी। उन्होंने दिन रात पढ़ाई कर नीट में बेहतर मुकाम हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे राजस्थान में खुशी की लहर है।

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मानव सेवा के लिए 51 हजार रुपए दिये

हाल ही नीट परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ। इस परीक्षा में राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर के भी कई बच्चों ने टॉप किया। यहां की रहने वाली तान्या भाटी ने भी नीट परीक्षा में 720 में से 670 अंक हासिल किए हैं। हालांकि यह अंक एक टॉपर के अंक नहीं है लेकिन इसके बाद भी राजस्थान की इस बेटी की चर्चा काफी ज्यादा है क्योंकि यह वही बेटी है जिसने कोरोना के समय अपनी गुल्लक में इकट्ठे किए हुए 51 हजार रुपए पीड़ित मानवता की सेवा करने के लिए जिला कलेक्टर को दिए थे।

सोशल मीडिया और मोबाइल से दूर रही बेटी

इनके घरवाले बताते हैं कि बेटी का हमेशा से ही डॉक्टर बनने का सपना था। इसलिए दसवीं परीक्षा पास करने के बाद ही उसे तैयारी के लिए सीकर छोड़ दिया। जहां उसने तैयारी की और अब परीक्षा को पास कर लिया है। तैयारी के दौरान बेटी सोशल मीडिया और मोबाइल दोनों से ही दूर रही।

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16 घंटे तक की पढ़ाई

तान्या ने परीक्षा की तैयारी के दौरान रोजाना 7 से 16 घंटे तक पढ़ाई की। इतना ही नहीं जैसे.जैसे परीक्षा नजदीक आई उन्होंने अपना टाइमिंग और ज्यादा बढ़ाया। आज नतीजा यह निकला कि अब जैसलमेर की यह बेटी डॉक्टर बनेगी और बचपन में जिस तरह पीड़ित मानवता की सेवा कीएअब भी वैसे ही काम करेगी।

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