जौनपुर के किसान की बेटी पूजा सिंह ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की मदद से पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमांडेंट बनने का सपना पूरा किया। जानिए संघर्ष से सफलता तक की पूरी प्रेरक कहानी।

लखनऊ, 05 जनवरी। कभी खेतों की मेड़ों पर सपनों को संभालने वाली एक किसान की बेटी आज देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने जा रही है। यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो सही समय पर सही हाथ थाम ले तो हालात भी रास्ता दे देते हैं। जौनपुर की पूजा सिंह की सफलता ने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी, अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल को नहीं रोक सकती।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से बदली किस्मत

उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने पूजा सिंह के संघर्ष को दिशा दी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मीं पूजा के पिता किसान हैं। सीमित आय में घर चलाना और उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाना आसान नहीं था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस योजना ने पूजा के लिए वह रास्ता खोल दिया, जो पहले बंद नजर आता था। पूजा खुद कहती हैं, “मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना ने मेरे सपनों को राह दी।”

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दिल्ली से जौनपुर तक का कठिन सफर

पूजा ने 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से पूरी की थी। आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली में रहना आर्थिक कारणों से संभव नहीं हो सका। मजबूरन उन्हें जौनपुर लौटना पड़ा और टीडी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। यह वह मोड़ था, जहां कई सपने टूट जाते हैं, लेकिन पूजा ने हार मानने के बजाय नए अवसर तलाशे।

मुफ्त कोचिंग बनी सबसे बड़ी ताकत

वर्ष 2024 में पूजा को मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के बारे में जानकारी मिली।

  • मई 2024 में आवेदन
  • जून 2024 से मुफ्त कोचिंग की शुरुआत

योजना के तहत उन्हें अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। नियमित कक्षाएं, व्यवस्थित पाठ्यक्रम और निरंतर रिवीजन ने उनकी तैयारी को मजबूती दी। कॉलेज के बाद रोज शाम करीब डेढ़ घंटे की कक्षाएं पूजा की दिनचर्या का हिस्सा बन गईं।

पूजा बताती हैं कि अगर निजी कोचिंग लेनी पड़ती, तो 1 से 1.5 लाख रुपये तक का खर्च आता, जो उनके परिवार के लिए असंभव था। अभ्युदय योजना ने यह आर्थिक बोझ पूरी तरह खत्म कर दिया।

पहले ही प्रयास में बड़ी सफलता

लगन, अनुशासन और सही मार्गदर्शन का नतीजा यह रहा कि पूजा सिंह ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी-सीएपीएफ परीक्षा पास कर ली और असिस्टेंट कमांडेंट बनीं। यह उपलब्धि सिर्फ पूजा की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की भी जीत है, जो योग्य युवाओं को बराबरी का मौका देने का दावा करती है।

गांव, परिवार और प्रदेश का नाम रोशन

पूजा की सफलता से उनके परिवार में गर्व का माहौल है। गांव में लोग उन्हें प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर सरकार की योजनाएं सही तरीके से ज़मीन तक पहुंचें, तो गांव की गलियों से भी अफसर निकल सकते हैं।

हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण

समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आज सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए उम्मीद बन चुकी है। आईएएस, पीसीएस, नीट, जेईई और सीएपीएफ जैसी परीक्षाओं की तैयारी अब आर्थिक मजबूरी के कारण अधूरी नहीं रह जाती।

पूजा सिंह की सफलता बताती है— संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, अगर अवसर और मेहनत साथ हों, तो अभ्युदय तय है।

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